February 15, 2026

श्री पंचवक्त्र-सिद्ध मंदिर को व्यास -सुकेती बाढ़ों से बचाने हेतु तटीयकरण एक मात्र हल

मंडी हिमाचल प्रदेश की धर्म संस्कृति की राजधानी पौराणिक श्री मांडव्य नगर छोटी काशी जिला मंडी शहर भारत के मानचित्र पर अंकित है। यहां के सबसे प्राचीन मंदिरों की श्रेणी में श्री त्रिलोकी नाथ,श्री पंचवक्त्र-सिद्ध और अर्द्ध नारीश्वर (शिव-पार्वती) मंदिर सर्वप्रथम आते हैं। पंद्रहवीं शताब्दी में इन मंदिरों का निर्माण रियासत कालीन सेन वंशजों ने अपने शासनकाल में करवाया था।श्री स्वयम्भू बाबा भूतनाथ मंदिर का निर्माण सन् ईस्वी 1526 में राजा अजवर सेन ने करा अपनी नई राजधानी श्री मांडव्य नगरी बसाई थी। श्री पंचवक्त्र-सिद्ध महादेवन महाकाल के रूप में भी विख्यात हुए तथापि चिरकाल से ही सभी रियासती राजाओं के मरणोपरांत यह उनका पवित्र श्मशानघाट भी है। कालान्तर में यहां कोई भी सुविधाएं उपलब्ध करवाने में जिला प्रशासन व सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
प्राचीन श्री मांडव्य ऋषि नगर जनपद छोटी काशी जिला मंडी शहर मुख्यालय के व्यास -सुकेती के तटों सन्निकट श्री पंचवक्त्र-सिद्ध मंदिर को बचाने हेतु तटीयकरण की ज़ोरदार दरकार है। गत दिनों व्यास और सुकेती की बाढ़ों ने मंदिर की ऐतिहासिक घेराबंदी की थी।
ऐसे में विभिन्न धर्म संस्कृति प्रेमियों ने मंदिर के अस्तित्व को लेकर बेहद चिंता व्यक्त की है।
इस बारे आम जनता जनार्दन ने कहा है कि मौजूदा हालात में श्री पंचवक्त्र-सिद्ध महादेवन मंदिर का बहुविधि संरक्षण समय की ज़ोरदार मांग है।
जनता का मानना है कि व्यास – सुकेती संगम पर दोनों तटों का जीर्णोद्धार करा तटीयकरण करवाने की हिमाचल सरकार से पुरजोर अपील की है। व्यास सुकेती का तटीयकरण ही पंचवक्त्र-सिद्ध महादेवन मंदिर को बचाने में बहुविधि सहायक सिद्ध हो सकता है। व्यास नदी व सुकेती खड्ड पर बाढ़ विभीषिका में नष्ट हुए पंचवक्त्र-सिद्ध पुल को युद्ध स्तर पर निर्माण करवाये जाने की मांग को सभी धर्म प्रेमियों ने प्रमुखता से उठाया है।
वास्तव में यह अत्यंत विचारणीय है कि श्री पंचवक्त्र-सिद्ध मंदिर
समीप पुराने श्मशानघाट का भी कोई जीर्णोद्धार आज दिन तक नहीं करवाया गया है।
पंचवक्त्र-सिद्ध महादेवन परिसर का तटीयकरण करा, यहां पर एक स्नान घाट बनवाने का भी सरकार से विनम्र आग्रह किया है। आम जनमानस की राय में धार्मिक पर्वों और सूर्य – चंद्र ग्रहणों में श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप व्यास नदी का सुरक्षात्मक तटीयकरण उपरांत व्यास नदी (विपाशा) की पावन धारा को पंचवक्त्र-सिद्ध महादेवन प्रांगण में में उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। अतः शहर वासियों ने पुनः दोहराया है कि पंचवक्त्र-सिद्ध महादेवन मंदिर से सटी दोनों व्यास नदी और सुकेती खड्ड का तटीयकरण करा धार्मिक श्रद्धालुओं हेतु सुविधाएं मुहैया करवाने की ज़ोरदार दरकार है।

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