January 26, 2026

नेपाल को दाना डाल कर आखिर चीन ने फंसा ही लिया

चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट पर नेपाल ने जता दी अपनी सहमति

नई दिल्ली: नेपाल और चीन की नजदीकियां अब भारत के लिए परेशानी का सबब बनने वाली हैं या फिर यूं कहें कि बन चुकी हैं। दरअसल भारत चीन के जिस बीआरआई प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है उसी प्रोजेक्ट पर पड़ोसी देश नेपाल ने अपनी सहमति जता दी और उस पर साइन भी कर दिए। दरअसल नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी पहली विदेश यात्रा पर चीन गए हुए हैं। यहां पर उन्होंने वही किया जिसकी अटकलें लगाई जा रही थीं। केपी शर्मा ओली ने चीन की ‘बेल्ट एंड रोड सहयोग के लिए रूपरेखा’ पर अपनी सहमति जताकर साइन कर दिए।

बीआरआई प्रोजेक्ट के लिए “सहायता वित्तपोषण” शब्द को “अनुदान वित्तपोषण” से बदलने के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से समझौता हुआ। दरअसल चीन ने नेपाल के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत परियोजनाओं को बीजिंग ही वित्त पोषित करेगा यानी सारा खर्चा चीन ही करेगा और नेपाल बीआरआई के तहत किसी तरह का कर्ज नहीं लेगा। अब इस समझौते पर साइन करने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि “बेल्ट एंड रोड फ्रेमवर्क सहयोग के तहत नेपाल-चीन आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।”

चीन और नेपाल दोनों ही भारत के पडो़सी देश हैं। भारत के लिए अपनी सीमा सुरक्षा और संप्रभुता के मोर्चों पर अब और भी चौकन्ना रहना जरूरी हो गया है। क्योंकि भारत चीन के पाकिस्तान में इस बीआरआई के प्रोजेक्ट सीपीईसी यानी चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा का विरोध कर रहा है क्योंकि इसका रास्ता पीओके से होकर निकल रहा है। दूसरी तरफ अब नेपाल ने भी इस बीआरआई पर सहमित जता दी है। ऐसे में अब सीमा के रास्ते भारत में चीनी पैठ आसान हो सकती है जो कि भारत की संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

नेपाल ने चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के जिस प्रारूप पर सहमति जताकर हस्ताक्षर किए हैं। वो अनुदान वित्तपोषण है यानी इसमें कर्ज और अनुदान दोनों ही शामिल हैं। ऐसे में चीन बाकी देशों की तरह नेपाल को भी अपने कर्ज में जाल में फंसाकर रख सकता है जिससे नेपाल को हमेशा चीन के भरोसे ही रहना पड़ सकता है जो कि भारत से उसके पड़ोसियों को दूर कर सकता है। क्योंकि फिर नेपाल के हर मामले में चीनी दखल बढ़ेगा।

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