हिमाचल में अप्रैल तक चलेंगी सरेंडर रूटों पर बसें, आम जनता को नहीं होगी परेशानी
शिमला, प्रदेश में एचआरटीसी के जिन सरेंडर रूटों पर अब तक बसें नहीं चल पाई हैं उनमें अप्रैल महीने तक प्राइवेट ऑपरेटर अपनी बसें चलाएंगे। तब तक एचआरटीसी उन रूटों पर सेवाएं जारी रखेगी। हाल ही में एचआरटीसी ने कहा था कि उनके द्वारा सरेंडर किए गए रूटों पर परिवहन विभाग अब तक बसों की व्यवस्था नहीं कर पाया है। इसमें खुद परिवहन विभाग ने भी काफी देरी की है लेकिन अब ऐसा कहा जा रहा है कि अप्रैल महीने तक 84 आबंटित रूटों पर बसों की व्यवस्था हो जाएगी। इसके साथ यह भी खुलासा हुआ है कि अगले सप्ताह एचआरटीसी 55 और बस रूटों के आबंटन के लिए विज्ञापन जारी करेगा। प्राइवेट ऑपरेटरों से उनके लिए भी आवेदन मांगेगा।
पुरानी बसें इस वजह से इन रूटों पर नहीं चल पाई है क्योंकि रूट परमिट देने के बाद 6 महीने का समय दिया जाता है। इसलिए विभाग का मानना है कि अप्रैल महीने तक रूटों पर बसें दौड़ेंगी। परिवहन विभाग ने जिन लोगों को रूटों का आबंटन जिन क्षेत्रों में किया है वहां पर कह दिया है कि ग्रांट ऑफ वेलिडिटी 6 महीने का है लिहाजा इस अवधि में रूटों पर बसों को शुरू कर दिया जाए। जैसे वह बसें शुरू करेंगे एचआरटीसी वहां से अपनी बसों को हटा देगा क्योंकि उनका रूट सरेंडर हो चुका है। यदि छह महीने के भीतर ये बसें नहीं चलाई जाती हैं तो इनका आबंटन रद्द हो जाएगा। इसके बाद ये रूट नए सिरे से आबंटित किए जाएंगे। ये वो रूट हैं जिन्हें हिमाचल पथ परिवहन निगम ने घाटे का बताकर सरेंडर किया था। परिवहन विभाग ने लंबी मशक्कत के बाद इन रूटों को आबंटित किया है। करीब दो महीने का समय बीत चुका है। जिन लोगों ने ये रूट लिए हैं वे अभी तक इस पर बसें ही नहीं चला रहे हैं। निदेशक परिवहन विभाग डीसी नेगी ने बताया कि ड्रॉ ऑफ लॉट्स के तहत रूटों का आबंटन किया गया है। जिसका भी नाम इसमें निकला था उन्हें बाकायदा ग्रांट आफ वेलिडिटी पत्र जारी किया गया है। इसकी मियाद छह महीने की है। छह महीने बस खरीद को ऋण लेने, बस की बॉडी इत्यादी तैयार कर इसे रोड़ पर लाने के लिए दिए जाते हैं। छह महीने तक यदि बस नहीं चलाते तो आबंटन स्वत: ही रद्द माना जाएगा। उसके बाद नए सिरे से आबंटन किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने घाटे के करीब 275 रूटों को सरेंडर किया था। इसमें 107 रूट पहले आबंटित किए थे जिसमें से केवल इसके बाद 168 रूटों को सरेंडर करने की मंजूरी सरकार ने दी थी। सरकार ने इन रूटों को निजी आप्रेटरों को देने का निर्णय लिया था। पहले सरेंडर 107 रूटों में से केवल 84 रूट ही निजी आप्रेटरों ने लिए हैं, शेष के लिए दोबारा से विज्ञापित कर निविदाएं मांगी जाएगी। 168 रूट जो दूसरी बार सरेंडर किए थे उन्हें दोबारा एग्जामिन करने के लिए वापिस भेजा गया था। इसमें से 55 रूट ही सही पाए गए। इन्हें भी नए सिरे से विज्ञापित किया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एचआरटीसी व परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक की थी। उसमें भी यह मामला उठा था। विभाग ने बताया है कि जिन आप्रेटरों ने परमिट लिए हैं उन्हें जल्द बसें चलाने के निर्देश जारी किर दिए गए हैं। फिलहाल अगले हफ्ते और 55 रूटों के लिए आबंटन की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। जिन जिलों में यह रूट हैं उनकी रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के आरटीओ ने परिवहन विभाग को भेज दी है। यह रिपोर्ट आने के बाद ही इसपर निर्णय लिया गया है। पिछले साल कैबिनेट ने इन रूटों के आबंटन की मंजूरी दे दी थी मगर तब इस प्रक्रिया को नहीं चलाया जा सका। अब परिवहन विभाग इनपर काम शुरू कर रहा है।
