February 18, 2026

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत 83 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ पहुंची

अहमदाबाद, ओदेश की पहली और सबसे महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना (अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर) का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी अपडेट सामने आई है। चार साल से अधिक की देरी के चलते इस प्रोजेक्ट की लागत में भारी इजाफा हुआ है। जिस प्रोजेक्ट को शुरुआत में करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये में पूरा करने का लक्ष्य था, अब उसकी अनुमानित लागत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह शुरुआती स्वीकृत राशि से लगभग 83 प्रतिशत ज्यादा है।

सरकार की प्रगति पहल के तहत आयोजित ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने बताया कि संशोधित लागत को लेकर अंतिम मुहर लगनी अभी बाकी है, लेकिन नया आंकड़ा 1.98 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। लागत के पुनरीक्षण का काम जारी है और उम्मीद है कि अगले एक-दो महीनों में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही इस परियोजना में देरी और बजट बढ़ने के पीछे मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण में अड़चनें, कानूनी मंजूरियों में लगा समय और ट्रेनों (रोलिंग स्टॉक) के चयन में हुई देरी को बताया गया है।

रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, 30 नवंबर तक इस परियोजना का भौतिक काम 55.6 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 69.6 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। अब तक इस पर 85,801 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने ही रेल मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा की थी और इस ड्रीम प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए थे।

लागत बढ़ने की खबरों के बीच प्रोजेक्ट ने एक अहम पड़ाव भी पार कर लिया है। शुक्रवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महाराष्ट्र के पालघर जिले में 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग के ब्रेकथ्रू का निरीक्षण किया। यह सुरंग विरार और बोईसर स्टेशनों के बीच स्थित है और इसे माउंटेन टनल-5 नाम दिया गया है। मंत्रालय ने इसे इंजीनियरिंग का एक बड़ा नमूना बताया। गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बीकेसी के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का काम भी पूरा कर लिया गया था।

बुलेट ट्रेन को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। भविष्य में इस ट्रैक पर जापान की आधुनिक ई10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेनें भी दौड़ सकेंगी। पर्यावरण के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट गेमचेंजर साबित होगा, क्योंकि इससे सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 95 प्रतिशत की कमी आएगी। योजना के मुताबिक, सूरत से बिलीमोरा के बीच का पहला चरण अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूरा 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर दिसंबर 2029 तक बनकर तैयार हो जाएगा।

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