उपचुनाव में नहीं खिल सका बीजेपी का कमल, इंडी गठबंधन की जीत के पीछे ये रही खास वजह
नई दिल्ली – देश के सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव परिणाम में जहां इंडिया समूह के दलों ने 10 सीटों पर जीत हासिल करके अपनी ताकत दिखायी वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दो सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा। बिहार की रूपौली विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने सभी को चौंका दिया। ऐसे में भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। बीजेपी की कई सीटों पर हुई हार के कई कारण है कि आखिर पार्टी की कमजोरी कहा पर रही।
स्थानीय मुद्दें रहे हावी
कई राज्यों में स्थानीय कारण भी बीजेपी की हार की वजह बने हैं। जैसे उत्तराखंड की बद्रीनाथ सीट पर बीजेपी की हार के पीछे कई स्थानीय वजहें मानी जा रही हैं। ऑल वेदर रोड जैसी विकास परियोजनाओं, पुरोहितों की नारागजी भाजपा को भारी पड़ी है। इसी तरह से उत्तराखंड में भी विकास प्रोजेक्ट्स के लिए पेड़ों व जंगलों का काटे जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। वहीं, पंजाब में आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए शीतल अंगुराल को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। जालंधर पश्चिम विधानसभा सीट पर शीतल आम आदमी पार्टी से विधायक थे, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान वे बीजेपी में शामिल हो गए थे। चुनावी नतीजों से साफ है कि आप से बीजेपी में शीतल का जाना जनता को पसंद नहीं आया और उन्होंने आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट मोहिंदर भगत को जीत दिलवा दी।
विपक्ष एक्टिव
उपचुनाव के नतीजों को देखने से साफ है कि लोकसभा चुनाव का असर अब भी देश में देखने को मिल रहा है। राजनैतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह के लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे, उससे विपक्षी दल को काफी बूस्ट मिला है। एनडीए के लिए 400 पार का दावा करने वाली बीजेपी को 240 सीटों पर रोकने के बाद विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेता फ्रंटफुट पर हैं। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संसद में जोरदार भाषण दिया तो कुछ ही दिनों के भीतर उन्होंने गुजरात, यूपी, मणिपुर जैसे राज्यों के एक के बाद एक दौरे किए। इससे कांग्रेस समेत विपक्षी दलों में नई ताजगी आ गई है। पिछले दस सालों में एक के बाद एक हार विपक्ष को नसीब हो रही थी, वह ट्रेंड एक ही लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बदल दिया है। इसी वजह से माना जा रहा है कि विधानसभा उपचुनाव में भी लोकसभा चुनाव के नतीजों का प्रभाव देखने को मिला। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी भले ही हमीरपुर सीट जीतने में कामयाब रही हो, लेकिन देहरा, नालागढ़ सीटें गंवा दी हैं। यूपी में कांग्रेस और सपा गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करके उत्तर भारत में वापसी की उम्मीद बनाई थी, वह उत्तराखंड और हिमाचल के उपचुनाव के नतीजों के बाद भी कायम रखी है।
नहीं चाहिए भाजपा
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में 13 सीटों के लिए विधानसभा उपचुनाव के परिणाम आने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा और उसके कार्यकर्ता जो भी कहें लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा से जनता का मोह खत्म हो गया है और अब उसे भाजपा नहीं चाहिए। खेड़ा ने कहा, “देशभर में 13 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आपके सामने हैं। लोकसभा चुनाव में जनता का संदेश बहुत स्पष्ट था लेकिन लोगों ने देखा कि सरकार में अभी भी वही घमंड और ऐंठन थी इसलिए देश की जनता ने महीने भर में दूसरी बार भाजपा को संदेश दिया है।
