पीपलू मेले में महिलाओं द्वारा लगाई जाएंगी मिठाइयों की बड़ी प्रदर्शनियां
बाजरे के लड्डू व रागी की बर्फी बेचकर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सुधारेंगी आर्थिकी
देसी घी व गुड से निर्मित मिठाइयां बाजार की मिठाइयों को देंगी टक्कर
अजय शर्मा , बंगाणा,
बाजरे के लड्डू व रागी की बर्फी क्षेत्र के लोगों द्वारा पसंद की जा रही है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मोटे अनाज से निर्मित मिठाईयां बाजार की अन्य मिठाइयों को टक्कर देने जा रही हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिठाइयों का प्रशिक्षण क्षेत्र में विभिन्न शिविरों के द्वारा दिया जा रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए बाजरे के लड्डू व रागी की बर्फी को बहुत पसंद किया जा रहा है। हाल ही में डूमखर बंगाणा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर महिलाओं द्वारा बनाए गए लड्डू व बर्फी का स्वाद जिलाधीश व क्षेत्र के विधायक भी ले चुके हैं व इन मिठाइयों की सराहना भी कर चुके हैं। मोटे अनाज से निर्मित इन मिठाइयों की चारों ओर सराहना की जा रही है। सबसे विशेष बात है कि इन मिठाइयों में देसी घी व देसी गुड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा समूह की महिलाओं को जिला स्तरीय पीपलू मेले में हाथ से निर्मित इन मिठाइयों की बड़े स्तर पर प्रदर्शनी लगाने के लिए तैयार किया जा रहा है। सरकार व विभाग का मानना है कि मोटे अनाज से तैयार किए गए खाने के यह उत्पाद महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में कारगर साबित होंगे। गौर रहे कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन बंगाणा द्वारा क्षेत्र में 650 स्वयं सहायता समूह का निर्माण किया गया है। इन स्वयं सहायता समूहों में 10 हजार के करीब महिलाएं अपने उत्पाद तैयार करके बाजारों में बेच रही हैं। क्षेत्र की कई महिलाओं को उनके उत्पादों कि बड़े स्तर पर बिक्री होने के कारण प्रदेश स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत समूह का निर्माण करके महिलाओं को कुछ दिनों का प्रशिक्षण देकर उत्पाद बनाने के प्रोत्साहित किया जाता है। क्षेत्र के विभिन्न सहायता समूह की महिलाओं द्वारा सेपू बड़ियां, कपड़े के बैग, अचार, मुरब्बा, सीरा, सेवियां, दलिया, सर्फ, झाड़ू व अनेक प्रकार के बांस के उत्पाद तैयार करके विभिन्न प्रदर्शनियों व बाजार में बेचे जा रहे हैं। छोटे स्तर पर हस्तनिर्मित इन उत्पादों से क्षेत्र की महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में मोटे अनाज को पैदा करने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बाजरा, मंडल, रागी जवार के बीज स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अनुदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं व महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है कि मोटे अनाज सस्ते व जल्दी तैयार होते हैं। मोटे अनाज से निर्मित होने वाले उत्पाद कैसे बनाए जाते हैं राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा समूह की महिलाओं को जगह जगह शिविर लगाकर प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं।
इस संबंध में विकास खंड अधिकारी सुरेंद्र जेटली ने कहा कि सरकार के आदेशों के मुताबिक विभाग द्वारा मोटे अनाज की खेती करने व उनके उत्पाद बनाकर बेचने के संबंध में विभिन्न शिविरों द्वारा महिलाओं को जानकारियां दी जा रही हैं ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
