बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए फिर से शुरू की वीजा सेवाएं
तारिक रहमान के पीएम बनते ही बड़ा फैसला,
नई दिल्ली, भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय से चल रही कड़वाहट अब धीरे-धीरे दूर होती नजर आ रही है। दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन ने शुक्रवार को भारतीय नागरिकों के लिए अपनी वीजा सेवाएं पूरी तरह से बहाल कर दी हैं। यह अहम फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब महज तीन दिन पहले ही तारिक रहमान ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में देश की कमान संभाली है। इस कदम को रहमान और उनकी पार्टी बीएनपी की तरफ से नई दिल्ली के साथ रिश्तों की कड़वाहट को दूर करने और संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में दोनों देशों के रिश्तों में भारी गिरावट के बाद वाणिज्य दूतावास और वीजा सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। यह तनाव भारत-विरोधी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़का था, जिसके चलते बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे और अल्पसंख्यक हिंदुओं को लिंचिंग का शिकार बनाते हुए निशाना बनाया गया था। हालांकि, अब ढाका की सत्ता से मुहम्मद यूनुस की विदाई और तारिक रहमान के नेतृत्व संभालने के बाद से ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक बार फिर से कूटनीतिक संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी है। शुक्रवार सुबह से मेडिकल और पर्यटन सहित वीजा की सभी श्रेणियां फिर से शुरू कर दी गई हैं, जबकि बिजनेस और वर्क वीजा पर पहले भी पूरी तरह रोक नहीं थी।
बांग्लादेश की इस पहल के बीच भारत की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। सिलहट में भारत के वरिष्ठ कांसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली भी जल्द ही बांग्लादेशी नागरिकों के लिए सभी प्रकार की वीजा सेवाएं पूरी तरह से बहाल करने की प्रक्रिया में है। फिलहाल मेडिकल और डबल-एंट्री वीजा जारी किए जा रहे हैं और जल्द ही यात्रा वीजा भी शुरू हो जाएंगे। इन कूटनीतिक सुधारों को गति देने के लिए इसी हफ्ते लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के रूप में तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की थी। बिरला ने पीएम मोदी का पत्र सौंपते हुए नए प्रधानमंत्री को भारत आने का निमंत्रण भी दिया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए दिल्ली का रुख करते हैं या नहीं, क्योंकि पूर्व में मुहम्मद यूनुस ने इस पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए चीन का दौरा किया था जिससे नई दिल्ली में नाराजगी देखने को मिली थी।
