January 25, 2026

बैलेट पेपर का होना चाहिए इस्तेमाल: नाना पटोले

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में हार के बाद फ़िर ईवीएम पर उठाए सवाल

मुंबई, महाराष्ट्र में निकाय चुनावों में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस ने मांग उठाई है कि राज्य में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाएं। कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने ईवीएम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। नाना पटोले ने कहा कि ईवीएम से भरोसा उठ गया है। नगर निगम चुनावों में हुई गड़बड़ी की वजह से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम हुआ है। वीवीपैट का इस्तेमाल न होना पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। यह चुनावी उदासीनता नहीं, बल्कि प्रशासनिक अक्षमता है। उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल फिर से शुरू किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने चिट्ठी में लिखा- 29 नगर निगमों के चुनावों ने महाराष्ट्र में चुनावी सिस्टम की पोल पूरी तरह से खोल दी है। शहरी इलाकों में बहुत कम मतदान प्रतिशत सिर्फ वोटर की बेपरवाही की निशानी नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में जनता के कम होते भरोसे की भी निशानी है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन चुनावों में वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसलिए, मतदाता से अपना वोट वेरिफाई करने का अधिकार छीन लिया गया। इसके अलावा, मीडिया में सैकड़ों वीडियो और असली उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें दिखाया गया है कि वोटरों की उंगलियों पर लगी स्याही हाथ धोने के बाद आसानी से उतर जाती है। इन सब वजहों से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं। मतदाता सूची में गड़बड़ी, मतदाताओं को मतदान केंद्र ढूंढने के लिए दो-तीन घंटे इंतजार करना, और आखिर में हजारों लोगों का बिना वोट दिए लौटना। ये सब चुनाव आयोग की नाकामी के गंभीर संकेत हैं। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल जनता के मन में उठ गया है। देश के कई राज्यों ने लोगों का भरोसा बनाए रखने और विवाद से बचने के लिए स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर पर कराने का फैसला किया है। तो महाराष्ट्र में ईवीएम पर इतना जोर क्यों? यह मजबूरी किसके फायदे के लिए है? यही सवाल आज आम वोटर पूछ रहा है।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि जिला परिषद और पंचायत समिति ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ हैं। अगर इन चुनावों को लेकर शक, अविश्वास और कुप्रबंधन का माहौल बना रहा, तो इसका राज्य के लोकतांत्रिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। इसलिए आने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर ही होने चाहिए, यह जनता की भावना है। इस जनता की भावना का सम्मान करते हुए आने वाले जिला परिषद पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर होने चाहिए।

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