इजराइल पर हमला- भारत के लिए एक सबक
हमास के आतंकियों ने जिस प्रकार इसराइल पर हमला कर महिलाओं, बच्चों को बंधक बना उन पर बर्बरता की है उस से दुनिया भर में इस आतंकी संगठन के प्रति प्रति दुर्भाव पैदा होना स्वाभाविक है। इन सब के बावजूद कुछ मुस्लिम देशों के साथ-साथ भारत के एक वर्ग विशेष में हमास के प्रति सहानुभूतिपूर्वक भाव है। हमास की यह बर्बरता अधिकांश भारतीयों के लिए हैरानी जनक नहीं है क्योंकि भारत के लोग सदियों पहले से बाहरी आक्रांताओं की क्रूरता को भुगतते रहे हैं। मुगलों के भारत आगमन से भी कई सदियों पहले से अनेकों विदेशी लुटेरों ने भारत पर हमले किए व यहां खूनी लूटपाट की। यह अलग बात है कि आज के दौर में दुनिया में इस तरह की बर्बरता कम ही सुनने में आती है। इजराइल में जो कुछ भी हुआ वह भारत के लिए एक सबक है व भारतीयों को भी सचेत रहने के लिए प्रेरित करता है क्योंकि भारत भी इजरायल की भांति ही पाकिस्तान, चीन जैसे शत्रुओं के निशाने पर है जो हमेशा से भारत पर हमला करने की ताक में बैठे रहते हैं।
हमास के आतंकियों द्वारा इजराइल में घुसकर की गई बर्बरता ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है। इन आतंकियों ने महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से निशाना बनाया। आतंकियों ने लोगों का न केवल बेरहमी से कत्ल किया बल्कि मजहबी नारे लगाती भीड़ ने महिलाओं को नंगा कर सड़कों पर घुमाया। इस व्यापक आतंकी हमले के दौरान महिलाओं से दुष्कर्म की भी खबरें आई है। यह सब भारत पर पिछले हजार वर्षों में हुए इस्लामी आक्रमणों और पाकिस्तान निर्माण के दौरान कट्टरपंथियों द्वारा की गई बर्बरता के इतिहास को आंखों के सामने जीवंत कर देने वाला है। प्रश्न यह उठता है कि आतंकी हमले की तैयारी होती रही लेकिन इजरायल की खुफिया एजेंसियां को उसकी भनक तक नहीं लगी।
हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल की जीत भारत के लिए जरूरी है क्योंकि इससे भारत के हित जुड़े हैं। अधिकतर पश्चिमी एशिया को इस्लामिक कट्टरवाद का केंद्र माना जाता है। इसराइल के कमजोर पड़ने से उन आतंकी शक्तियों का भी हौसला बढ़ेगा जो भारत को निशाना बनाती रहीं हैं। अगर इजरायल कमजोर पड़ता है तो पाकिस्तान जैसे देशों का आतंकवाद में विश्वास और मजबूत होगा। ऐसी स्थिति में इस्लामी कट्टरपंथी शक्तियां मिश्र और सऊदी अरब जैसे देशों की वर्तमान सरकारों के लिए भी बड़ा खतरा बन जाएगी जो मध्ययुगीन कट्टरपंथी विचारधारा से निकलकर आधुनिकता की ओर जाने का प्रयास कर रही हैं। यहां यह भी समझना आवश्यक है कि ईरान के साथ भारत के संबंध भले ही अपेक्षाकृत ठीक हों परंतु उसका परमाणु हथियार हासिल करना भारत और मानवता के हित में नहीं होगा। ईरान में कट्टरपंथ के उदय ने पिछले चार दशकों में इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद की समस्या को बढ़ाया है। ईरान सरकार ने अपने हित साधने के लिए पाकिस्तान की तरह ही व्यापक स्तर पर आतंकी संगठनों को खड़ा किया है।
भारत का इजरायल के पक्ष में खड़ा होना देश के एक समुदाय विशेष के साथ-साथ कुछ राजनीतिक दलों को भी चुभ रहा है। इन्हें भी समझना चाहिए कि वर्तमान में भारत का हित इजरायल के साथ खड़ा होने में ही है। वैसे भी इसराइल ने भारत के साथ समय-समय पर अपने मित्र भाव को प्रकट किया है। ऐसे में मोदी सरकार ने इजरायल के प्रति अपनी नीति स्पष्ट कर उचित कदम उठाया है।
