प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक मामले में 26 किसानों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
चंडीगढ़: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में चूक के मामले में 26 किसानों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस बात का खुलासा सुरक्षा में चूक के 3 साल बाद हुआ है। अदालत ने आरोपितों में से एक कमलजीत सिंह की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह घटना 5 जनवरी, 2022 को हुई थी। इसके कारण प्रधानमंत्री को अपने कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था।
यह पंजाब पुलिस और नागरिक प्रशासन के लिए भी एक बड़ी शर्मिंदगी का कारण बना क्योंकि यह भारत में इस तरह की पहली घटना थी। हालांकि मामला 11 महीने बाद ही दर्ज कर लिया गया था लेकिन उस समय पंजाब में चुनाव था इसलिए इस बात का खुलासा नहीं हुआ था। पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली में जाने के दौरान प्रधानमंत्री का काफिला लगभग आधे घंटे तक एक फ्लाईओवर पर रोका गया था। बता दें कि राज्य पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था लेकिन इसे किसानों के विरोध के डर से दबा दिया गया जिन्होंने प्रधानमंत्री को रोक दिया था।
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के निलंबन की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा करेंगी। इस बीच पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस घटना पर खेद व्यक्त किया और दावा किया कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कोई चूक नहीं की थी। फिरोजपुर पुलिस की ओर से गठित विशेष जांच दल ने 26 आरोपियों के खिलाफ मामले की जांच के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत आरोप जोड़ा है।
इसके बाद एसआईटी ने आरोपों में आईपीसी की धारा 307 (प्रयासपूर्वक हत्या), 353 (सार्वजनिक सेवक को रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल), 341 (गलत तरीके से प्रतिबंध) और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों को शामिल किया, जिसमें प्रधानमंत्री के सुरक्षा काफिले में बाधा पहुंचाने की गंभीरता का हवाला दिया गया था। यह तथ्य दिसंबर 2022 में एफआईआर में जोड़ा गया था, लेकिन यह अब सामने आया है। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि अगर किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है या उनकी गिरफ्तारी की जाती है तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
