January 25, 2026

सीमा-पार से किसी भी दुस्साहस का सख्ती से जवाब दिया जाएगा: सेना प्रमुख

कहा, ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी

नई दिल्ली, भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की संतुलित, सटीक और दृढ़ प्रतिक्रिया ने सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध देश की तैयारी, निर्णायक क्षमता और रणनीतिक स्पष्टता को प्रदर्शित किया। सेनाध्यक्ष ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि देश के उत्तरी बॉर्डर पर हालात स्थिर हैं, लेकिन इसके साथ ही निरंतर सतर्कता बरती जा रही है। थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि उत्तरी मोर्चे पर स्थिति स्थिर है, किंतु निरंतर सतर्कता आवश्यक बनी हुई है। शीर्ष स्तर की वार्ताओं, संपर्क की पुनर्बहाली और विश्वास-निर्माण उपायों से स्थिति में क्रमिक सामान्यीकरण हो रहा है। वहीं बांग्लादेश को लेकर सेनाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय सेना ने बातचीत के लिए अलग-अलग चैनल खोल रखे हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं उनकी बात भी होती रहती है। थलसेना प्रमुख के अलावा नेवी चीफ और एयर चीफ भी बात कर चुके हैं। भारतीय सेना का डेलीगेशन भी वहां गया था। यह इसलिए है ताकि कोई मिसकम्युनिकेशन न हो। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, उच्चतम स्तर पर निर्णायक प्रतिक्रिया का स्पष्ट निर्णय लिया गया। इसके परिणामस्वरूप ऑपरेशन सिंदूर की परिकल्पना और क्रियान्वयन अत्यंत सटीकता के साथ किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को 22 मिनट की तीव्र कार्रवाई तथा 10 मई तक चले 88 घंटे के समन्वित अभियान के माध्यम से इस ऑपरेशन ने रणनीतिक मान्यताओं को पुनर्परिभाषित किया। आतंकवादी ढांचे पर गहरे प्रहार किए गए। आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और लंबे समय से चली आ रही परमाणु धमकियों की बयानबाजी को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी किया गया। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने नौ में से सात लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। इसके बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रियाओं पर सटीक, संतुलित और नियंत्रित उत्तर सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। भारतीय सीमा से सटे पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाकों में अब भी कैंप मौजूद हैं। भारतीय सेना की नजर इन पर है और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई होगी।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा- हमारी जानकारी में करीब 8 कैंप अभी भी एक्टिव हैं। इनमें से 2 अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के अपोजिट और 6 नियंत्रण रेखा के अपोजिट हैं। इन कैंपस में अभी भी उपस्थिति है। हम उन पर नजर रखे हुए हैं अगर कोई हरकत हुई तो जो हमारा इरादा है हम ज़रूर (कार्रवाई को) अंजाम देंगे।

इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष ने सीएपीएफ, खुफिया एजेंसियों, नागरिक निकायों, राज्य प्रशासन और विभिन्न मंत्रालयों जैसे गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय आदि की भूमिका की सराहना की।

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