खेतों में पराली व कूड़ा जलाने की प्रतिदिन दी जाए जानकारी- अनमजोत कौर
किसानों से धान की पराली में आग न लगाने की अपील की
संदीप गिल, नंगल, फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और मानव जीवन पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव के बारे में किसान जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। किसानों को फसल अवशेषों को खेतों में समाहित करके मृदा स्वास्थ्य में सुधार के बारे में भी प्रेरित किया जाना चाहिए। धान की पराली के प्रबंधन और उसके निस्तारण के दृष्टिगत अधिकारी प्रतिदिन गांवों में जाकर किसानों से संपर्क रखें और उन्हें पराली को आग न लगाने के लिए जागरूक करें। इसके साथ ही पराली प्रबंधन एवं दैनिक स्थिति से संबंधित कार्य भी रिपोर्ट तैयार करें। यह खुलासा अनमजोत कौर उपमंडल मजिस्ट्रेट नंगल ने धान की पराली के प्रबंधन को लेकर क्लस्टर, नोडल और फीलर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान किया।
एसडीएम ने क्लस्टर, नोडल व फीलर अधिकारियों से जीरो बर्निंग सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पराली जलाकर शासन के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उल्लंघन करने वालों के चालान व जमीन में रेड इंट्री दर्ज की जाये। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी पराली में आग न लगाई जाए, इस संबंध में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाए। पराली प्रबंधन हेतु कृषि विभाग द्वारा अनुदान पर उपलब्ध करायी जाने वाली कृषि मशीनरी का उपयोग उपयोग के प्रति प्रेरित रहें।
एसडीएम ने किसानों से सहयोग मांगा और पराली को आग न लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली को जमीन में मिलाकर गेहूं की बुआई करनी चाहिए, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर बुरा प्रभाव पड़ता है, साथ ही मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव भी मर जाते हैं, जिससे फसल की पैदावार कम हो जाती है। पराली जलाने से निकलने वाले धुएं के कारण सड़कों पर हादसों का डर रहता है। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
