21वीं सदी के भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने में कृषि व्यवस्था की बड़ी भूमिका
लोकसभा चुनाव जीतने और तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार वाराणसी गये नरेन्द्र मोदी ने किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उनका सपना है कि दुनिया में खाने की हर मेज पर भारतीय अनाज या यहां का कोई न कोई खाद्य उत्पाद जरूर हो। पीएम मोदी ने कहा, इस सपने को पूरा करने के लिए हमें खेती में भी जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट वाले मंत्र को बढ़ावा देना है। मोटे अनाज श्रीअन्न का उत्पादन हो, औषधीय गुण वाली फसल हो या फिर प्राकृतिक खेती की तरफ बढऩा हो, किसान समृद्धि केंद्रों के माध्यम से किसानों के लिए बड़ा सपोर्ट सिस्टम विकसित किया जा रहा है। सेवापुरी में किसान सम्मान सम्मेलन में उन्होंने बटन दबाकर देश के 9.26 करोड़ किसानों के खाते में सम्मान निधि की 17वीं किस्त के रूप में करीब 20 हजार करोड़ की राशि स्थानांतरित की। लाभार्थियों में पंजाब के 12 लाख भी शामिल हैं। साथ ही, अलग-अलग राज्यों से आई कृषि सखियों को प्रमाणपत्र भी दिए। पीएम मोदी ने कहा, 21वीं सदी के भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने में कृषि व्यवस्था की बड़ी भूमिका है। हमें वैश्विक रूप से सोचना होगा, दुनिया के बाजार को ध्यान में रखना होगा। देश को दलहन और तिलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। कृषि निर्यात में अग्रणी बनना है। पीएम ने कहा, यह कार्यक्रम तीन करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम है। कृषि सखी से बहनों को सम्मान व आय के नए साधन मिलेंगे। पीएम ने कहा, बनारस का लंगड़ा आम, जौनपुर की मूली, गाजीपुर की भिंडी, ऐसे कई उत्पाद आज विदेशी बाजार में पहुंच रहे हैं। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट और जिला स्तर पर एक्सपोर्ट हब बनने से निर्यात बढ़ रहा है। उत्पादन भी एक्सपोर्ट क्वालिटी का होने लगा है। डिब्बाबंद भोजन के वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ानी है, देश को नई ऊंचाई पर ले जाना है। पीएम ने कहा, माताओं-बहनों के बिना खेती की कल्पना भी असंभव है। नमो ड्रोन दीदी की तरह ही कृषि सखी कार्यक्रम ऐसा ही प्रयास है। देशभर में 30 हजार से अधिक सहायता समूहों को कृषि सखी के रूप में प्रमाणपत्र दिए गए हैं। अभी 12 राज्यों में यह योजना शुरू हुई है। देश में हजारों महिला समूहों को इससे जोड़ा जाएगा।
भारत को अगर विश्व स्तर पर आर्थिक शक्ति के रूप में पहचान बनानी है तो उसे कृषि निर्यात पर ध्यान देना होगा। आर्थिक दृष्टि से देखें तो भारतीय अर्थ व्यवस्था का कमजोर पहलू कृषि क्षेत्र ही है। कृषि उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की नहीं है और न ही फसलों की विविधिता को लेकर किसान गंभीर दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह सपना कि विश्व के हर मेज पर भारतीय कृषि उत्पाद दिखाई दे, ऐसा सपना है जिसको साकार करने के लिए सरकार और किसान को मिलकर कार्य करना होगा। सरकार अगर कृषि उत्पाद तथा निर्यात बढ़ाना चाहती है तो उसे किसान को विश्वास में लेकर ही अपनी कृषि नीति बनानी होगी। अतीत में बनाये तीन कृषि कानूनों के रद्द होने के बावजूद भी किसान आंदोलन कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि किसानों को सरकार की नीतियों पर विश्वास नहीं। किसान सम्मान निधि की 20 हजार करोड़ रुपए की 17वीं किश्त किसानों का भरोसा जीतने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। लेकिन किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो इसके लिए उसे कृषि निर्यात के क्षेत्र में उत्साहित करना होगा। किसान संगठनों तथा कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी आगे आकर कृषि उत्पाद तथा निर्यात को लेकर चर्चा कर सरकार व किसान को सहयोग देना चाहिए।
कृषि उत्पाद व कृषि उत्पाद आधारित उद्योगों के विकास के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कृषि निर्यात को लेकर जो सपना देखा गया है वह साकार हो सकेगा।
