September 7, 2026

“पंजाब के पानी की रक्षा नारों, दिखावे, राजनीतिक प्रदर्शनों या पुलिस की तैनाती से नहीं हो सकती

अगर भगवंत मान पंजाब के पानी को लेकर गंभीर हैं, तो उनकी सरकार ने पंजाब कोटे के करीब 2,500 बी.बी.एम.बी. पद खाली क्यों छोड़े?”

अमृतसर, भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्वेत मलिक ने अमृतसर में प्रेस वार्ता की जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सलिल कपूर ने की , इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता बख्शी राम अरोड़ा , राकेश गिल , सुखमिंदर पिंटू , राम चावला , कुमार अमित , मनीष शर्मा , मोहित महाजन , गौरव गिल व अश्वनी शर्मा उपस्थित थे l मलिक ने कहा कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) में पंजाब कोटे के करीब 2,500 पद खाली छोड़कर पंजाब के जल अधिकारों के मुद्दे पर अपने दोहरे मापदंडों को उजागर कर दिया है, जबकि पानी से जुड़े विवाद उठते ही पंजाब पुलिस को तैनात कर दिया जाता है।

मलिक ने सवाल किया, “अगर भगवंत मान वास्तव में पंजाब के जल हितों की रक्षा को लेकर गंभीर हैं, तो उनकी सरकार ने चार वर्षों से अधिक समय तक पंजाब कोटे के करीब 2,500 वैध बी.बी.एम.बी. पदों को खाली क्यों रहने दिया?”

उन्होंने कहा कि बी.बी.एम.बी. में पंजाब की संस्थागत कमजोरी सीधे तौर पर मान सरकार की प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। इसके विपरीत, हरियाणा की भाजपा की नायब सिंह सैनी जी ने वर्ष 2021 के आसपास एक अलग बी.बी.एम.बी. संवर्ग बनाया और अपने कोटे के पदों को भरने के लिए लगातार कदम उठाए, जिससे बोर्ड में उसकी संस्थागत उपस्थिति मजबूत हुई। उन्होंने कहा, “हरियाणा ने अपनी संस्थागत स्थिति मजबूत की, जबकि पंजाब की भगवंत मान की आप’ सरकार ने अपने ही पद खाली पड़े रहने दिए।”

मलिक ने कहा कि मान सरकार इस मुद्दे से अनजान होने का दावा नहीं कर सकती क्योंकि अक्टूबर 2024 में भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पंजाब बी.बी.एम.बी. के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में है लेकिन लगभग दो वर्ष बाद 2026 तक भी हजारों पद खाली हैं। वर्ष 2025 के अंत में मंत्रिमंडल द्वारा विशेष बी.बी.एम.बी. संवर्ग को मंजूरी दिए जाने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अगस्त 2026 में भी सिंचाई मंत्री ने स्वीकार किया कि भर्ती नियम अभी तैयार किए जा रहे हैं जबकि सरकार के अब केवल 5 महीने बचे है l

मलिक ने भगवंत मान को कहा, “पंजाब के पानी की रक्षा नारों, दिखावे, राजनीतिक प्रदर्शनों या पुलिस की तैनाती से नहीं हो सकती। विवाद के दौरान पुलिस तैनात की जा सकती है, लेकिन वह बी.बी.एम.बी. के भीतर पंजाब के वैध पदों पर नहीं बैठ सकती।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब को बी.बी.एम.बी. में अपने स्वीकृत कोटे के पदों पर इंजीनियरों, फोरमैनों, तकनीकी कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य योग्य कर्मचारियों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “संस्थागत उपस्थिति का अर्थ है कि जब निर्णय लिए जाएं और कार्यों का प्रबंधन हो, तब सक्षम पंजाबी अधिकारी और कर्मचारी निर्णय प्रक्रिया में मौजूद हों। हितों की रक्षा इसी तरह होती है—हर विवाद के बाद जागने और राजनीतिक प्रदर्शन करने से नहीं यह भगवंत मान सरकार को समझना चाहिए Better Prevent and Prepare than Repent and Repair .

मलिक ने पंजाब सरकार से पंजाब कोटे के सभी रिक्त पदों को तत्काल भरने, सार्वजनिक रूप से समयबद्ध भर्ती कार्यक्रम जारी करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

मलिक ने कहा, “चार वर्षों से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद मान सरकार के पास अब कोई बहाना नहीं बचा है। उसने पंजाब के पानी पर भाषण तो दिए, लेकिन पंजाब के पद खाली छोड़ दिए। पुलिस भेजकर इस प्रशासनिक विफलता को छिपाया नहीं जा सकता। यह प्रतिनिधित्व के बिना बयानबाजी और कार्य के बिना राजनीति है।”

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