August 31, 2026

भारतीय अर्थव्यवस्था की तूफानी रफ्तार: अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही विकास दर

मुंबई, भारतीय अर्थव्यवस्था की तूफानी रफ्तार जारी है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है। यह पिछले साल की समान अवधि की विकास दर 6.9 प्रतिशत से 0.9 प्रतिशत ज्यादा है। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में नॉमिनल जीडीपी की विकास दर 10.3 प्रतिशत रही है। वहीं, वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में यह 8.1 प्रतिशत रही है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जबकि नॉमिनल आधार पर यह 11.5 प्रतिशत रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास को रफ्तार तृतीयक क्षेत्र ने दी है। इसकी विकास दर 10 प्रतिशत की रही है। इस दौरान, तृतीयक क्षेत्र में ‘फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज’ ने 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ तेजी का नेतृत्व किया है। द्वितीयक क्षेत्र की विकास दर स्थिर कीमतों में 8.6 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र 2.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। इस दौरान कृषि और उससे जुडे सेगमेंट की विकास दर 3.6 प्रतिशत रही है।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) की वृद्धि दर 11.9 प्रतिशत रही है। यह वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 5.8 प्रतिशत थी। वहीं,इस दौरान निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीएफ)में स्थिर कीमतों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो दिखाता है कि देश में निजी खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। अगस्त की शुरुआती में मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) के फैसलों के ऐलान के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7 प्रतिशत बताया था।

उन्होंने कहा कि जून 2026 के बाद से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई-साइड पर पड़ने वाला दबाव कुछ कम हुआ है। साथ ही कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह से संघर्ष के फिर से बढ़ने के कारण ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता फिर से पैदा हो गई है।

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