July 14, 2026

सत्ता बदलते ही कोलकाता लौट रहीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन

20 साल का वनवास खत्म

कोलकाता, लंबे समय से अपने बेबाक विचारों के लिए पहचानी जाने वाली और बांग्लादेश से निर्वासित मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर कोलकाता लौट रही हैं। वह आगामी 1 अगस्त को प्रतिष्ठित रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले एक कट्टरपंथ-विरोधी कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिरकत करेंगी। इस कार्यक्रम में कई नामी कवि और लेखक भी भाग ले रहे हैं। खुद तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रशंसकों को यह खुशखबरी दी है। उनकी इस बहुप्रतीक्षित वापसी की घोषणा के बाद से ही साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में चर्चाओं और बहसों का एक नया दौर शुरू हो गया है।

तसलीमा नसरीन का कोलकाता से गहरा नाता रहा है, लेकिन अतीत में उन्हें यहां भारी विरोध का सामना भी करना पड़ा था। गौरतलब है कि तत्कालीन वामपंथी (लेफ्ट) सरकार के कार्यकाल के दौरान तसलीमा नसरीन के खिलाफ शहर में तीव्र और हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके चलते कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। इसी दबाव और सुरक्षा कारणों के चलते साल 2007 में उन्हें मजबूरन कोलकाता छोड़ना पड़ा था। इसके बाद से तसलीमा ने शहर लौटने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार सुरक्षा का हवाला देते हुए उनके कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। नतीजतन, वह करीब दो दशकों तक कोलकाता वापस नहीं लौट सकीं।

लेखिका का विवादों से पुराना नाता रहा है। तसलीमा नसरीन को उनकी बहुचर्चित और विवादास्पद पुस्तक लज्जा के प्रकाशन के बाद साल 1994 में अपना देश बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। उस समय बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया था और उन्हें सरेआम जान से मारने की धमकियां दी गई थीं। अपनी जान बचाने के लिए वह दो महीने तक छिपती रहीं और आखिरकार 1994 के अंत में स्वीडन चली गईं। तब से लेकर आज तक वह लगातार निर्वासन का जीवन जी रही हैं और उनके मूल देश बांग्लादेश में उनकी कई किताबों पर सख्त प्रतिबंध लगा हुआ है।

इस बार उनके कोलकाता दौरे का उद्देश्य बेहद खास है। उन्हें ‘सेकुलर मिशन’ और एचआरबीएफएफ द्वारा आयोजित इस अहम कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह निमंत्रण कट्टरवाद के खिलाफ तसलीमा के लंबे और अटूट रुख तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उनके अदम्य संघर्ष को सम्मानित करने के लिए दिया गया है। अपनी वापसी की खुशी जाहिर करते हुए लेखिका ने फेसबुक पर उस्मान मलिक नाम के एक शख्स की पोस्ट भी शेयर की है। इस पोस्ट में लिखा गया है- लंबे इंतजार का अंत। 18 साल, 8 महीने और 10 दिन बाद… सभी प्रतिक्रियावादी ताकतों को परास्त कर वे लौट रही हैं। हम उनके संघर्ष के साथ थे, हैं और आगे भी रहेंगे।

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