July 7, 2026

मोबाइल रिपेयरिंग व्यवसाय से आत्मनिर्भर बना ऊना का युवा

ऊना, ऊना जिले के बहडाला गांव के 26 वर्षीय अविनाश की जिंदगी कभी गहरे संघर्षों से घिरी हुई थी। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के बाद उनके सामने जीवनयापन और भविष्य दोनों बड़ी चुनौती बन गए थे। लेकिन हौंसले, कड़ी मेहनत और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से मिले सहयोग ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज अविनाश ऊना शहर की कपिला मार्केट में अपना मोबाइल रिपेयरिंग एवं एक्सेसरीज का सफल कारोबार संचालित कर सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
अविनाश जब पांचवीं कक्षा में थे, तभी उनके पिता, जो दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, का निधन हो गया। उसके बाद उनकी मां ने सीमित संसाधनों में दोनों बेटों का पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी निभाई। लेकिन कुछ वर्षों बाद, अविनाश की मां भी स्वर्ग सिधार गईं । कम उम्र में ही माता-पिता दोनों का साया उठ जाने से जीवन की सारी जिम्मेदारियां दोनों भाइयों के कंधों पर आ गईं।
विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अविनाश ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। दसवीं की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने नंगल में मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के उपरांत उन्होंने विभिन्न मोबाइल रिपेयरिंग दुकानों में लगभग सात वर्षों तक कार्य कर व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। अनुभव और आत्मविश्वास के बल पर दो वर्ष पहले उन्होंने ऊना की कपिला मार्केट में किराये पर एक छोटी-सी दुकान लेकर अपना मोबाइल रिपेयरिंग एवं एक्सेसरीज का कारोबार शुरू किया। शुरुआत में दुकान पर केवल मोबाइल रिपेयरिंग की सुविधा, कुछ सेकेंड हैंड मोबाइल फोन और सीमित मोबाइल एक्सेसरीज ही उपलब्ध थीं। मेहनत, ईमानदारी और बेहतर सेवा के कारण ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ता गया, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कारोबार का विस्तार आसान नहीं था।
सुख आश्रय से मिला सहारा
इसी दौरान मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उनके जीवन में नई उम्मीद बनकर आई। योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मिली। इस सहयोग से उन्होंने दुकान का विस्तार किया, आधुनिक उपकरण खरीदे और मोबाइल रिपेयरिंग के साथ अन्य तकनीकी सेवाएं भी शुरू कीं। योजना के तहत उनके भाई को भी प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है।
आज अविनाश की दुकान पर नए एवं सेकेंड हैंड मोबाइल फोन, मोबाइल एक्सेसरीज तथा मोबाइल रिपेयरिंग सहित विभिन्न तकनीकी सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रतिदिन करीब 50 से 60 ग्राहक उनकी दुकान पर पहुंचते हैं। इस व्यवसाय से वे प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। ग्राहकों के बढ़ते विश्वास और बेहतर सेवाओं के दम पर उनका कारोबार लगातार आगे बढ़ रहा है तथा अब वे अपने व्यवसाय का और विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
अविनाश कहते हैं कि माता-पिता के निधन के बाद कई बार लगा कि अब आगे बढ़ पाना मुश्किल होगा। लेकिन मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से मिले सहयोग ने मुझे अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए वे कहते हैं कि सरकार की सहायता ने उन्हें आर्थिक संबल देने के साथ ही अपने भविष्य पर दोबारा भरोसा करना भी सिखाया। आज वे आत्मनिर्भर हैं और अपने मोबाइल रिपेयरिंग कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं।
सरकार ही परिवार, सीएम सुक्खू की संवेदनशील सोच का सुफल है मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर 28 फरवरी, 2023 को शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ऐसे बच्चों और युवाओं को सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास है, जिन्होंने कम उम्र में माता-पिता का संरक्षण खो दिया है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा दिया है। सरकार पात्र बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक शिक्षा, देखभाल और अन्य आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी निभा रही है। योजना के तहत पात्र युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

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