एनसीईआरटी ने कक्षा-9 के सिलेबस में शामिल किया एसआईआर और चुनाव आयोग
चुनावी प्रक्रिया के बारे में बच्चों को मिलेगी जानकारी
नई दिल्ली, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में एक नया अध्याय शामिल किया है। इस अध्याय के माध्यम से छात्र-छात्राओं को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- एसआईआर) और चुनाव आयोग की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी।
नई पुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया को बेमिसाल बताते हुए कहा गया है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने, मतदाता सूची तैयार करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुस्तक में पहली बार एसआईआर पर अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें बताया गया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, उसकी जांच करना और त्रुटियों को दूर करना है। एनसीईआरटी के अनुसार, इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।
अध्याय में यह भी उल्लेख है कि एसआईआर के दौरान 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाते हैं। वहीं, जिन मतदाताओं का निधन हो चुका है, जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया है या जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज हैं, उन्हें सूची से हटाया जाता है। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने से पहले नागरिकों से दावे और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं, ताकि किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सके।
नई पुस्तक में चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, वीवीपैट, आदर्श आचार संहिता और मतदाता जागरूकता अभियानों का भी उल्लेख किया गया है।
छात्रों के लिए एक गतिविधि भी शामिल की गई है, जिसमें उन्हें 1977, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बनी गठबंधन सरकारों का अध्ययन करने के लिए कहा गया है।
गौरतलब है कि एनसीईआरटी के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब देश के कई विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
