गंगा में मांस खाकर हड्डियां फेंकने वाले 6 आरोपियों की जमानत मंजूर
कोर्ट बोला- गंगा पूरे देश की आस्था
प्रयागराज, धर्मनगरी वाराणसी में पवित्र गंगा नदी में बजड़े (नाव) पर इफ्तार पार्टी के दौरान मांस खाने और उसकी हड्डियां व कचरा नदी में फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने छह अन्य आरोपियों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने इस मामले में जेल में बंद दानिश सैफी, नूर इस्लाम, आमिर कैफ़ी, महफूज आलम, मोहम्मद अहमद और मोहम्मद अव्वल की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। कोर्ट ने यह फैसला आरोपियों द्वारा अपने कृत्य पर बिना शर्त माफी मांगने और हलफनामा दायर करने के बाद सुनाया है।
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने एक बेहद अहम और कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि पवित्र गंगा नदी सिर्फ हिंदुओं की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और सम्मान की प्रतीक है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों ने अपने हलफनामे के पैरा 14 में स्पष्ट तौर पर दर्शाया है कि वे अपने कृत्य के लिए गहरा खेद व्यक्त कर रहे हैं और उनके परिवारों को भी समाज को पहुंची ठेस और पीड़ा पर भारी पछतावा है। आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास न होने, 17 मार्च से जेल में बिताई गई अवधि और उनके द्वारा मांगी गई माफी को आधार मानते हुए कोर्ट ने प्रथम दृष्टया जमानत का मामला स्वीकार कर लिया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अदालत के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने इस घटना के पीछे एक बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि पवित्र नदी में इफ्तार पार्टी का आयोजन करना, मांस खाना, उसका वीडियो बनाकर अपलोड करना और इसके जरिए जानबूझकर धार्मिक विद्वेष पैदा करना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। इस दलील पर कोर्ट ने दो टूक कहा कि मामले की जांच के लिए अब आरोपियों को आगे जेल में रखने की आवश्यकता नहीं है; पुलिस अपनी जांच बाहर भी जारी रख सकती है। इससे पहले भी 15 मई को इसी पीठ ने पांच और न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने तीन अन्य आरोपियों को जमानत दे दी थी।
