May 4, 2026

ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी- डील करो, वरना तबाही तय

सीजफायर के बीच महायुद्ध की आहट

नई दिल्ली, अमेरिका और ईरान के बीच भले ही फिलहाल सीजफायर लागू हो, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता। परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका फिर तेज हो गई है।

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और शांति बहाली के प्रयासों पर चर्चा की। ईरान की ओर से कहा गया कि वह कूटनीतिक रास्ते से अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव को खत्म करना चाहता है। हालांकि सीजफायर के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बार-बार तीन अहम मुद्दों पर अटक रही है। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण और भविष्य में हमले नहीं करने की गारंटी शामिल है। अमेरिका इन मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है, जबकि ईरान भी अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पहले की तुलना में कमजोर स्थिति में है और समझौते के लिए दबाव में है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के पास डील का प्रारूप पहुंच चुका है और जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान ने “गलत कदम” उठाया तो सैन्य विकल्प खुला रहेगा। उधर, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री दबाव का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। भारी तेल उत्पादन के बावजूद ईरान को निर्यात में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसकी आय प्रभावित हुई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ रहा है जो ईरानी तेल पर निर्भर रहे हैं, खासकर चीन। ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तों के जवाब में तेहरान ने नया प्रस्ताव भेजा है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव में तनाव कम करने के लिए चरणबद्ध योजना, होर्मुज क्षेत्र में राहत और परमाणु मुद्दे पर सीमित लचीलापन शामिल है। इसके साथ ही ईरान ने प्रतिबंधों में ढील और सुरक्षा की गारंटी की मांग भी दोहराई है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि उनका देश बातचीत और शांति के लिए तैयार है, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अब यह अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह कूटनीति को प्राथमिकता देता है या टकराव का रास्ता चुनता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अविश्वास और कठोर शर्तों के कारण समझौते की राह आसान नहीं दिख रही। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या नया प्रस्ताव मध्य पूर्व में शांति ला पाएगा या फिर क्षेत्र एक बड़े संकट की ओर बढ़ेगा।

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