April 28, 2026

खानपान ही नहीं कफ से भी है मोटापा का संबंध

जानिए क्या कहता है आयुर्वेद

आज के समय में बढ़ता वजन या मोटापा एक बड़ी समस्या बन चुकी है। अक्सर इसका दोष खान-पान पर मढ़ा जाता है। मगर कम ही लोग जानते हैं कि यह शरीर में बढ़ते ‘कफ दोष’ का भी नतीजा हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, जब कफ और मेद (चर्बी) बढ़ जाता है, तो शरीर भारी होने लगता है, भूख कम लगती है, लेकिन वजन तेजी से बढ़ता है। इसे आयुर्वेद में स्थौल्य कहते हैं। आयुर्वेद के विशेषज्ञ बताते हैं कि कफ का गुण ठंडक, भारीपन और स्थिरता हैं। यही गुण जब बढ़ जाते हैं, तो पाचन धीमा हो जाता है, मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ता है और चर्बी जमा होने लगती है। खासकर पेट, कूल्हे और जांघों में चर्बी बढ़ना कफ-प्रधान मोटापे का लक्षण है। कफ बढ़ने के मुख्य कारण पर नजर डालें तो ठंडी-भारी चीजें जैसे दही, आइसक्रीम, ज्यादा दूध का सेवन, देर तक सोना, कम चलना-फिरना, तला-भुना, मीठा और फास्ट फूड ज्यादा खाना, रात को देर से और भारी खाना, दिन में झपकी लेना और आलस्य वजह हैं।
आयुर्वेद में कफ-प्रधान मोटापे के लक्षण को भी बताया गया है। इसमें सुबह शरीर भारी लगना, कम भूख लेकिन मीठा खाने की तलब, चेहरा फूला-फूला सा रहना, पसीना कम आना, जल्दी थकना, सुस्ती और नींद ज्यादा आना और पाचन धीमा और कभी-कभी कब्ज की समस्या भी शामिल है।
आयुर्वेद कहता है कि कफ को संतुलित करने पर वजन अपने आप कम हो जाता है। इसके लिए कुछ आसान उपाय हैं, जैसे दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू-शहद के पानी से करें। मूंग दाल, खिचड़ी, जौ, दलिया जैसे हल्के भोजन लें। करेला, मेथी, परवल, लहसुन-अदरक, हल्दी ज्यादा इस्तेमाल करें। मौसमी सब्जियां और फल लाभदायी हैं। मीठा, तला हुआ, दही, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक का सेवन न के बराबर करें। रात का खाना हल्का और जल्दी खाएं। सुबह जल्दी उठें।
सूर्य नमस्कार, कपालभाति, अग्निसार जैसे प्राणायाम करें और दिन में सोने से बचें और नियमित समय पर खाना खाएं। कफ दोष को संतुलित करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है। कोई भी उपाय शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर से लेनी चाहिए। रात में मेथी दाना भिगोकर सुबह खाने से लाभ मिलता है। खाली पेट त्रिफला चूर्ण और दिन में छाछ में सेंधा नमक डालकर पीना भी लाभ देता है।

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