April 23, 2026

ईरान द्वारा समंदर में बिछी इंटरनेट केबल काटने की धमकी से भारत पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली, मिडिल ईस्ट में सुलग रही जंग की आग अब समंदर की गहराइयों तक पहुंच गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ी समाचार एजेंसी तसनीम की एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट में फारस की खाड़ी के नीचे बिछे इंटरनेट केबलों और महत्वपूर्ण क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी मैपिंग की गई है। रक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों ने इसे खाड़ी देशों सहित वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए एक बेहद गंभीर चेतावनी माना है।

इस रिपोर्ट में होर्मुज स्ट्रेट को केवल तेल और गैस के लिए ही नहीं, बल्कि यूएई, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों को जोड़ने वाले संचार नेटवर्क के लिए एक अहम ‘चोकपॉइंट’ बताया गया है। ईरान की तरफ से यह साफ संकेत दिया गया है कि युद्ध की स्थिति में इन अंडरसी डेटा केबलों और लैंडिंग स्टेशनों को दबाव बनाने के लिए आसानी से काटा या तबाह किया जा सकता है। यह खतरा इसलिए भी ज्यादा खौफनाक हो जाता है क्योंकि हाल ही में ईरानी ड्रोन हमलों ने यूएई और बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेज के डेटा सेंटर्स को भी निशाना बनाया था, जिसने इस पूरे क्षेत्र में डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है।

समंदर के नीचे से रची जा रही ईरान की इस साजिश का सीधा और भयानक असर भारत पर भी पड़ सकता है। दुनिया भर को जोड़ने वाला यह अंडरसी केबल नेटवर्क ओमान, यूएई और पाकिस्तान जैसे कई संवेदनशील इलाकों में बने लैंडिंग स्टेशनों से होकर गुजरता है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था काफी हद तक इन्हीं कनेक्शनों पर टिकी हुई है। अगर ईरान किसी भी तरह से इन केबलों को काटता है या नुकसान पहुंचाता है, तो भारत में इंटरनेट की स्पीड धड़ाम से गिर सकती है। इससे न सिर्फ करोड़ों आम यूजर्स प्रभावित होंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेक्टर को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *