अयातुल्ला खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा ईरान
तेहरान, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को कई हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी इस बात को लेकर भारी असमंजस में हैं कि उन्हें कब और कहां सुपुर्द-ए-खाक किया जाए। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह देश की बेहद संवेदनशील सुरक्षा स्थिति है। सरकार को डर है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कार के दौरान इजरायल की ओर से कोई बड़ा हवाई हमला हो सकता है या फिर देश के भीतर ही जनता के बीच भारी अशांति और विरोध प्रदर्शन भड़क सकते हैं। मौजूदा युद्ध जैसे हालातों में सरकार कोई भी बड़ा जोखिम लेने से बच रही है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी। इन भीषण हमलों में 3000 से अधिक लोग मारे गए थे, जिसने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग को और भड़का दिया। इसके बाद सरकार ने 4 मार्च से तीन दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार की योजना बनाई थी, लेकिन लगातार बढ़ते हमलों के खतरे को देखते हुए इसे रद्द करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में दफनाने पर विचार किया जा रहा है। यहां मौजूद इमाम रजा दरगाह का धार्मिक महत्व भी है और सुरक्षा के लिहाज से यह जगह अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित मानी जाती है।
8 अप्रैल को हुए अस्थाई युद्धविराम के बावजूद मध्य पूर्व में हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चित बने हुए हैं। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता भी पूरी तरह बेनतीजा रही है। हालांकि सीधे तौर पर युद्ध शुरू होने की कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की कड़ी नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने स्पष्ट किया है कि बातचीत चलने का मतलब यह कतई नहीं है कि ईरान की सेना शांत बैठी है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थों के जरिए भले ही बातचीत के प्रयास जारी हों, लेकिन ईरान को अपने दुश्मनों पर जरा भी भरोसा नहीं है। गालिबफ ने खुली चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी वक्त युद्ध छिड़ सकता है और उनकी सेनाएं जमीनी स्तर पर हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
