महिलाओं और बच्चों के पोषण को प्राथमिकता देना आवश्यक: बाल मुकुंद शर्मा एवं डॉ. एस.पी. कत्याल
धर्मशाला,
महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती पर प्रभावी रूप से विजय प्राप्त की जा सकती है। इस दिशा में विभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
ये विचार पंजाब खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री बाल मुकुंद शर्मा तथा हिमाचल प्रदेश खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एस.पी. कत्याल ने गत दिवस धर्मशाला के समीप टंग स्थित आंगनवाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी सहयोग और बेहतर तालमेल के साथ कार्य करना होगा। तभी ‘मिशन भरपूर’ जैसे अभियानों को धरातल पर पूर्ण सफलता मिल सकेगी।
उल्लेखनीय है कि ‘मिशन भरपूर 2.0’ का शुभारंभ 9 अप्रैल को सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी), पालमपुर के सभागार में किया गया। इस मिशन का उद्देश्य 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना है।
दोनों अध्यक्षों ने जन-स्वास्थ्य, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने का आह्वान करते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों से ही इस दिशा में सार्थक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
बाल मुकुंद शर्मा ने कांगड़ा प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए पंजाब में भी इसी तर्ज पर कुपोषण उन्मूलन के लिए सी.एस.आई.आर.-आईएचबीटी से तकनीकी सहयोग लेने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में प्रारंभ हुए मिशन के पहले चरण में 68 प्रतिशत कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। इसी सफलता को ध्यान में रखते हुए अब मिशन का दूसरा चरण ‘मिशन भरपूर 2.0’ शुरू किया गया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चों को आंगनवाड़ी से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्थानीय विद्यालयों में मिड-डे मील एवं रसोईघर का निरीक्षण किया तथा विद्यालयों में ‘पोषण वाटिका’ विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि बच्चों को ताजी एवं जैविक सब्जियां उपलब्ध कराई जा सकें।
डॉ. एस.पी. कत्याल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों एवं सहायिकाओं के मानदेय में इस बजट में बढ़ोतरी की है, जिससे वे अपना कार्य और बेहतर ढंग से कर सकें तथा उनकी क्षमता में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी से जुड़ी सभी महिलाओं का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे हमारे भविष्य, हमारे बच्चों के पोषण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि पालमपुर में आयोजित कार्यशाला की तर्ज पर अन्य जिलों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि पोषण अभियान का लाभ जन-जन तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि उनके द्वारा केंद्र सरकार से अनुशंसा की गई है कि विकलांग बच्चों और वृद्धजन को उनके घर द्वार पर राशन उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया जाए और प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के तहत 6 हजार की राशि उन महिलाओं को भी प्रदान की जाए जिनके गर्भपात हो जाते हैं या जिनके मृत बच्चे जन्म लेते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार यह भी अनुशंसा की है कि राशन वितरण से पहले राशन की गुणवत्ता की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध की जा सके ।
इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, कांगड़ा अशोक शर्मा द्वारा विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई।
इस अवसर कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा
विभिन्न जिलों के महिला एवं बाल विकास अधिकारी, पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं एवं आशा वर्कर भी उपस्थित रहे।
