March 29, 2026

भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए 38 हजार मीट्रिक टन फ्यूल की मदद भेजी

नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में भारी तनाव का असर दुनिया के अलग-अलग देशों में देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत ने अपने पड़ोसी देश श्रीलंका की मदद के लिए उसे 38 हजार मीट्रिक टन फ्यूल की मदद भेजी है। भारत की ओर से इस मदद के लिए श्रीलंकाई नेताओं ने धन्यवाद किया। वहीं सांसद और श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के राष्ट्रीय आयोजक और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे ने श्रीलंकाई सरकार को फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट जैसे मॉडल पर काम करने की सलाह दी। उन्होंने भारत की नीतियों की जमकर सराहना की। नमल राजपक्षे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों ने एक बार फिर श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम की समय पर शिपमेंट करके नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी को बनाए रखा है। भारत हमेशा संकट के समय में श्रीलंका के लिए सबसे पहले खड़ा रहा है। जरूरी सप्लाई से लेकर आर्थिक मदद तक, जो उसकी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सच्ची झलक है। एक क्षेत्र के तौर पर यह जरूरी है कि देश क्षेत्र की बेहतरी के लिए रणनीतिक साझेदार के तौर पर मिलकर काम करें।
उन्होंने श्रीलंकाई सरकार से भारत का मॉडल अपनाने की सलाह दी और कहा कि हम श्रीलंका सरकार से अपील करते हैं कि वह भारत के हालिया फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट जैसे मॉडल पर विचार करे। भारत ने एक्साइज ड्यूटी इसलिए कम नहीं की, ताकि कीमतें तुरंत कम हों, बल्कि मार्केट को स्थिर करने और ग्लोबल तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान और बढ़ोतरी को रोकने के लिए ऐसा किया।
नमल राजपक्षे ने कहा- जैसे-जैसे श्रीलंका आगे बढ़ेगा, सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों को भी मजबूत करना होगा। हालांकि फिस्कल डिसिप्लिन जरूरी है, लेकिन भारत के ज्यादा ग्रोथ-ओरिएंटेड अप्रोच में देखा गया ज्यादा टैक्स बोझ कम करने से निवेश को बढ़ावा देने, नागरिकों पर दबाव कम करने और लंबे समय की रिकवरी में मदद मिल सकती है।
भारत ने यह पहली बार आगे आकर श्रीलंका की मदद नहीं की है, इससे पहले भी कई बार भारत ने नेबरहुड फर्स्ट की नीति को अपनाते हुए अपने पड़ोसी की मदद की है। ऐसे में भारत जैसे एक अच्छे और मददगार पड़ोसी की अहमियत पर जोर देते हुए नमल राजपक्षे ने कहा कि मजबूत साझेदारी बनानी और बचानी चाहिए, उनका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।

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