March 13, 2026

वात प्रवृत्ति वालों के लिए औषधि है यह आहार, सूखेपन और कमजोरी से मिलेगी मुक्ति

नई दिल्ली,  आयुर्वेद के मुताबिक, हमारा शरीर तीन दोषों और सात धातुओं से मिलकर बना है। तीन दोषों में कफ, पित्त और वात शामिल हैं। एक स्वस्थ शरीर के लिए तीनों दोषों का संतुलित होना बहुत जरूरी है लेकिन आज हम वात दोष के बारे में बात करेंगे। वात दोष आकाश और वायु से मिलकर बना होता है और इस प्रवृत्ति की प्रधानता वाले लोग दिखने में पतले-दुबले, कमजोर और रुखेपन से ग्रसित होते हैं, और इसके पीछे का मुख्य कारण है आहार।

शरीर को प्रवृत्ति के अनुसार भोजन करना चाहिए, जिससे अच्छा आहार और गुण मिलकर शरीर को निरोगी बनाए रखें, लेकिन आज के आधुनिक समय में शरीर की प्रवृत्तियों के बारे में कम ही लोग जानते हैं और अपने स्वाद के अनुसार भोजन करते हैं लेकिन आज हम आयुर्वेद के अनुसार वात दोष वाले लोगों के लिए सही आहार की जानकारी लेकर आए हैं।

वात दोष वाले लोगों को अपने आहार में साबुत अनाज शामिल करना चाहिए क्योंकि यह भारी और चिकना होता है। वात दोष वालों में थकान और रुखापन दोनों होता है, और ऐसे में साबुत अनाज ताकत और चिकनाई दोनों देता है, जिससे शरीर का रुखापन नियंत्रित होगा। घी और दूध का सेवन भी वात दोष वाले लोगों के लिए आहार में शामिल करना जरूरी है।

दूध और घी दोनों ही पोषण और चिकनाई देने वाले उत्पाद हैं। ये वात और पित्त को बढ़ने से रोकते हैं और इसके साथ ही शरीर को सूखेपन से भी बचाते हैं। घी त्वचा को गहराई से पोषण देने में भी मददगार है। सूखे मेवे और मगज के बीज का भी वात दोष वाले लोग सेवन कर सकते हैं।

सूखे मेवे और मगज के बीज में तेल, गर्माहट और पोषण तीनों मिलते हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा और ओज दोनों भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं। साथ ही, ऐसे लोगों को बासी भोजन से परहेज करना चाहिए और हमेशा ताजा और पका हुआ भोजन ही करना चाहिए। बासी भोजन शरीर में वात और कफ को असंतुलित करता है। वात दोष वाले लोगों को रोजाना मीठे और रसीले फलों का सेवन करना चाहिए। आहार में आम, केला, पपीता, अंगूर और सेब को शामिल कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *