March 4, 2026

भीषण युद्ध के बीच समंदर में फंसे 700 से ज्यादा तेल टैंकर

क्या भारत में आसमान छूने वाले हैं पेट्रोल के दाम?

नई दिल्ली, ईरान और अमेरिका के बीच भड़के भीषण युद्ध का सबसे खौफनाक असर अब पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों से आने वाले तेल के सबसे अहम रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर तेल टैंकरों की आवाजाही में मार्च महीने में 80 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस समुद्री जलमार्ग पर सैकड़ों टैंकरों का एक लंबा और डरावना जाम लग गया है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इस अहम समुद्री रास्ते को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान कर दिया है और यहां से गुजरने वाले किसी भी टैंकर को आग के हवाले करने की खुली और खौफनाक धमकी दी है।विंडवॉर्ड एंड केप्लर कंपनी के जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से केवल तीन टैंकर ही गुजर सके, जिनमें 28 लाख बैरल तेल लदा था। वहीं, दो मार्च को यह संख्या घटकर सिर्फ एक छोटे टैंकर और एक कार्गो जहाज तक सिमट गई। वर्तमान में हालात यह हैं कि इस संकरे समुद्री रास्ते के दोनों तरफ करीब 706 गैर-ईरानी तेल टैंकर बीच समंदर में फंसे हुए हैं। इनमें 334 क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) ले जाने वाले जहाज, 109 डर्टी प्रोडक्ट टैंकर और 263 क्लीन प्रोडक्ट जहाज शामिल हैं, जो आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।ऊर्जा विश्लेषण कंपनी रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो पूरी दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत बड़ा हिस्सा है। इस संकरे और रणनीतिक मार्ग को दुनिया का सबसे अहम ‘चोकपॉइंट’ माना जाता है। इसके उत्तर में ईरान बसा है, जबकि यही वह इकलौता समुद्री रास्ता है जहां से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान का तेल व गैस पूरी दुनिया में निर्यात होता है। इसके बंद होने का सीधा मतलब है वैश्विक आपूर्ति का बुरी तरह चरमरा जाना।ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने पश्चिमी देशों को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर कोई भी जहाज इस रास्ते से जबरन गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के जवान और ईरानी नौसेना बिना किसी हिचकिचाहट के उन जहाजों को बीच समंदर में आग के हवाले कर देगी। ईरान के इस आक्रामक रुख ने समंदर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।पश्चिम एशिया में कच्चे तेल की आपूर्ति ठप होने की आशंका से भारतीय कारोबारियों और आम जनता की भी धड़कनें तेज हो गई हैं। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि यह युद्ध और हमले लंबे समय तक खिंचते हैं, तो कच्चे तेल के साथ-साथ भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। हालांकि, भारत का पेट्रोलियम मंत्रालय इस गंभीर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और तेल कंपनियों के साथ आपात बैठक कर देश में कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता व किफायती दरें सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

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