गुजरात में विवाह पंजीकरण से पहले माता-पिता को सूचना अनिवार्य
गांधीनगर, गुजरात सरकार ने लव जिहाद के मामलों को रोकने और लड़कियों की सुरक्षा के लिए विवाह पंजीकरण नियमों में बड़े बदलाव की घोषणा की है। 20 फरवरी 2026 को राज्य विधानसभा में उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने गुजरात मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 2006 के नियमों में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया। यह बदलाव मुख्य रूप से अंतर-धार्मिक विवाहों (खासकर लव जिहाद के आरोप वाले मामलों) में धोखाधड़ी, पहचान छिपाने और बालिका/युवतियों को बहला-फुसलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय दूल्हा-दुल्हन को एक घोषणा-पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने अपने माता-पिता को इस विवाह की जानकारी दी है या नहीं। आवेदन में दोनों पक्षों के माता-पिता के नाम, पता, आधार कार्ड नंबर और मोबाइल नंबर जैसे विवरण जमा करने होंगे। असिस्टेंट रजिस्ट्रार आवेदन की जांच के बाद 10 कार्य दिवसों के अंदर माता-पिता को व्हाट्सएप, ईमेल या अन्य माध्यम से सूचना भेजेगा। विवाह प्रमाण-पत्र जारी करने में अब 30 से 40 दिनों का समय लगेगा, ताकि आपत्तियां या जांच पूरी हो सके। सभी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड होंगे, और एक अलग पोर्टल भी बनाया जाएगा। गवाहों की तस्वीरें और आधार कार्ड भी अनिवार्य होंगे।
हर्ष संघवी ने कहा कि यह कदम बेटियों की इज्जत, सनातन परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है। उन्होंने ‘लव जिहाद’ को सांस्कृतिक आक्रमण करार दिया और कहा कि पहचान छिपाकर (जैसे सलीम बनकर सुरेश बनना) शादी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह प्रस्ताव 30 दिनों तक जनता से सुझाव-आपत्तियां मांग रहा है, जिसके बाद अंतिम नियम बनेंगे।
गुजरात में पिछले वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां युवतियों को बहला-फुसलाकर अन्य राज्यों में ले जाया गया। महाराष्ट्र में भी इसी तरह की मांग उठ रही है। कई घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं जहां हिंदू लड़कियों को धोखा देकर शादी की गई और उन्हें अन्य इलाकों में ले जाया गया। महाराष्ट्र सरकार से भी ऐसे नियम लागू करने की अपील की जा रही है ताकि युवा हिंदू लड़कियों को सुरक्षा मिले।
