हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निगम कल्याण भवन सोलन
हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निगम की स्थापना 14 नवम्बर 1979 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा एक अधिनियम पारित कर की गई थी। प्रारंभ में इस निगम की स्थापना केवल अनुसूचित जाति परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी और उस समय निगम का नाम हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति विकास निगम था। वर्ष 1984 में भारत सरकार तथा हिमाचल प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया कि अनुसूचित जनजाति परिवारों को भी वित्तीय सहायता प्रदान करने का कार्य इस निगम को सौंपा जाए। फलस्वरूप निगम के अधिनियम में संशोधन कर निगम का नाम परिवर्तित कर “हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निगम” कर दिया गया। तब से ही यह निगम इन वर्गो के परिवारों को अपने कारोबार को बढ़ाने
तथा अन्य रोज़गार चलाने के लिए आर्थिक सहायता देता और दिलाता रहा है । निगम की ऋण योजनाओं का विवरण अनुलग्नक ”क“ पर संलग्न है। निगम को हिमाचल सरकार के माध्यम SHARE CAPITAL उपलब्ध करवाया जाता है जिसमें 51 % हिमाचल सरकार (राज्य भागधन) तथा 49 % केन्द्रीय सरकार (केन्द्रीय भागधन) के रूप मे उपलब्ध करवाया जाता है। प्रारम्भ मे (1979-80) मे मु0 88 लाख की SHARE CAPITAL उपलब्ध करवाई गई थी तथा वर्तमान मे इस निगम को मु0 101.12 करोड़ की SHARE CAPITAL उपलब्ध करवाई जा चुकी है।
निगम के माध्यम से प्रारम्भ से वर्तमान तक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कुल 2,61,399 लाभार्थियों को मु0 40330.43 लाख रूपये की अर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है ।
यह निगम (1.) राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम
(2.) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम
(3.) राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम, नई दिल्ली के सौजन्य से चलाई जा रही ऋण योजनाओ के अन्तर्गत राज्य चैनेलाईजिन्ग एजेन्सी के रूप मे कार्य करता है
