गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 45 ‘गुमनाम नायकों’ को मिलेगा पद्मश्री
नई दिल्ली, गणतंत्र दिवस के जश्न से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म पुरस्कार 2026’ का ऐलान कर दिया है। मोदी सरकार ने अपनी परंपरा को कायम रखते हुए इस बार भी उन ‘गुमनाम नायकों’ को तरजीह दी है, जिन्होंने खामोशी से समाज की तस्वीर बदलने का काम किया है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 45 ऐसे लोगों को ‘अनसंग हीरोज’ कैटेगरी में पद्मश्री से नवाजा जाएगा, जो अब तक सुर्खियों से कोसों दूर थे, लेकिन उनका काम बोलता है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, देश के कोने-कोने से छुपी हुई प्रतिभाओं को खोजकर सम्मानित किया गया है। इसमें अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडिस, भगवानदास रायकर और आदिवासी कल्याण के लिए काम करने वाले भिकल्या लाडक्या ढिंडा जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा बृज लाल भट्ट, बुधरी ताठी, चरण हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव और धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या को भी उनके विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से सेवा की है।
स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने वाले विशेषज्ञों को भी इस सूची में विशेष स्थान मिला है। इनमें डॉ. कुमारसामी थंगराज, जम्मू-कश्मीर से डॉ. पद्म गुरमेत, तमिलनाडु के डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसन और उत्तर प्रदेश के डॉ. श्याम सुंदर शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान के गफरुद्दीन मेवारती, हैली वार, इंदरजीत सिंह सिद्धू, के पजानिवेल, मध्य प्रदेश के कैलाश चंद्र पंत और हरियाणा के खेम राज सुंदरियाल को भी पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, कला और समाज सेवा में जीवन खपा देने वाले साधकों का भी सम्मान किया है। कोल्लक्कयिल देवकी अम्मा, महेंद्र कुमार मिश्रा, मीर हाजीभाई कसमभाई, मोहन नागर, नरेश चंद्र देव वर्मा और निलेश मंडलेवाला जैसे नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं। वहीं, नूरुद्दीन अहमद, ओथुवर थिरुथानी, पोकिला लेखथेपी, आर कृष्णन और आरएस गोडबोले को भी पद्मश्री मिलेगा। इसके अलावा रघुपत सिंह, रघुवीर खेडकर, राजस्थानपति कलियप्पा गौंडर, रामा रेड्डी मामिडी, एसजी सुशीलम्मा, सांग्युसांग एस पोंगेनर, शफी शौक, श्रीरंग देवाबा लाड, सिमांचल पात्रो और सुरेश हनागावडी केएआर को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।
इस वर्ष के पद्म पुरस्कार पूरी तरह से उन साधारण भारतीयों को समर्पित हैं जिन्होंने असाधारण काम किया है। इन विजेताओं ने व्यक्तिगत संघर्षों और कठिनाइयों के बावजूद समाज सेवा को ही अपना जीवन लक्ष्य बनाया। इनमें से कई विजेता पिछड़े वर्गों, दलित समुदायों, आदिम जनजातियों और दुर्गम क्षेत्रों से आते हैं। यह सम्मान उन डॉक्टरों के लिए है जिन्होंने हीमोफीलिया जैसी चुनौतियों पर काम किया या भारत का पहला ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ स्थापित किया। यह सम्मान उन लोगों के लिए है जो सीमावर्ती राज्यों में राष्ट्रीय एकता को मजबूत कर रहे हैं, जो विलुप्त होती भाषाओं और पारंपरिक मार्शल आर्ट को बचा रहे हैं। ये सभी विजेता उस भारत का प्रतीक हैं, जो बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप राष्ट्र निर्माण में जुटा हुआ है।
