January 25, 2026

जानबूझकर संपत्ति छिपाने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं: हाईकोर्ट

चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी है और कुरुक्षेत्र की फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जो पत्नी जानबूझकर अपनी नौकरी, आय और वित्तीय संपत्तियों को छिपाती है, वह भरण-पोषण की हकदार नहीं हो सकती।

न्यायमूर्ति आलोक जैन ने कहा कि धारा 125 का उद्देश्य असहाय महिलाओं और बच्चों को संरक्षण देना तथा उन्हें दरिद्रता और भटकाव से बचाना है। यह प्रावधान त्वरित राहत के लिए बनाया गया है, न कि इसके दुरुपयोग के लिए। ऐसे मामलों में याचिकाकर्ता पर यह दायित्व होता है कि वह यह साबित करे कि वह स्वयं और अपने बच्चे का भरण-पोषण करने में असमर्थ है।

अदालत ने पाया कि वर्तमान मामले में पत्नी ने अपनी नौकरी और आय से जुड़े तथ्यों को छिपाया जबकि पति की आय को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने सख्त शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है तो उसे न केवल साफ हाथों से, बल्कि साफ मन, साफ दिल और साफ उद्देश्य के साथ आना चाहिए। याचिका कुरुक्षेत्र की फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें पत्नी की भरण-पोषण अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि उसने अपने रोजगार और आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर दबाया है।

मामले में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने एक बच्ची को गोद लेने का दावा किया था, लेकिन जिरह के दौरान उसने स्वीकार किया कि पति ने इस गोद लेने के लिए कभी सहमति नहीं दी। इसके समर्थन में कोई वैध दस्तावेज, औपचारिक समारोह या आधिकारिक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने इसे न्यायालय को गुमराह करने और अनुचित सहानुभूति हासिल करने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास करार दिया। महत्वपूर्ण रूप से, याचिकाकर्ता ने यह भी स्वीकार किया कि उसके पास किसान विकास पत्र और पब्लिक प्रोविडेंट फंड खाते हैं, जिनमें कुल मिलाकर 15 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा है। इसके अतिरिक्त उसके अन्य बैंक खाते भी हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि ये तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ता किसी तात्कालिक आर्थिक संकट में नहीं है, जिससे भरण-पोषण की आवश्यकता उत्पन्न हो।

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि पत्नी 5 जुलाई 2019 से अलग रह रही है और इस अवधि में उसने किसी भी प्रकार की आर्थिक तंगी को प्रमाणित नहीं किया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वह उच्च शिक्षित है और उसके पास बीएड, एमए (हिंदी) तथा एमए (आर्ट एंड क्राफ्ट) जैसी डिग्रियां हैं और वह लगातार रोजगार में रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *