बर्बरता की इंतहा: इरान में 16 हजार प्रदर्शनकारियों का नरसंहार
सीधे सिर में मारी गई गोली
वाशिंगटन, ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से सुलग रही विरोध की आग अब भीषण रूप ले चुकी है और इसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। महंगाई और गिरते रियाल जैसे आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे तौर पर सत्ता विरोधी लहर और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ बगावत में बदल गया है। जमीन पर मौजूद डॉक्टरों के हवाले से तैयार की गई एक चौंकाने वाली नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार की बर्बर कार्रवाई में अब तक कम से कम 16,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और 3 लाख 30 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। चिंताजनक बात यह है कि मरने वालों और घायलों में अधिकांश 30 वर्ष से कम उम्र के युवा हैं।
अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने अब तक 3,090 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें ज्यादातर आम प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इसके अलावा 22 हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं। वहीं, सुप्रीम लीडर खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि मौजूदा अशांति में कई हजार मौतें हुई हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी सरकार की जिम्मेदारी मानने के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘अपराधी’ करार दिया और प्रदर्शनकारियों को ‘अमेरिका का फुट सोल्जर’ बताया। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, घायलों को सिर, गर्दन और छाती पर निशाना बनाकर गोलियां मारी गई हैं, जो स्पष्ट रूप से मिलिट्री-ग्रेड हथियारों के इस्तेमाल की पुष्टि करती हैं।
जर्मन-ईरानी नेत्र सर्जन प्रोफेसर अमीर परस्ता ने देश के मौजूदा हालात को ‘डिजिटल अंधेरे के कवर में हो रहा नरसंहार’ करार दिया है। तेहरान के प्रमुख अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार, हजारों लोगों को आंखों में चोटें आई हैं और करीब 700 से 1,000 लोग अपनी आंखों की रोशनी पूरी तरह खो चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि कई मौतें सिर्फ इसलिए हुईं क्योंकि सुरक्षा बलों ने घायलों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) तक की इजाजत नहीं दी। प्रोफेसर परस्ता ने चेतावनी दी है कि यह क्रैकडाउन अब बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंच गया है। देश में कई हफ्तों से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट ने ईरान को दुनिया से पूरी तरह काट दिया है, जिससे सूचनाओं का प्रवाह ठप पड़ा है।
