January 25, 2026

ग्रीनलैंड पर जो देश बीच में आयेगा उस पर टैरिफ ठोंकेगे: ट्रंप

वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में उथल पुथल मचा दी है। इस बार विवाद का केंद्र बना है ग्रीनलैंड। ट्रंप ने संकेत दिया है कि दुनिया के जो देश ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की रणनीति का समर्थन नहीं करेंगे, उन पर अमेरिका भारी टैरिफ लगा सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की सक्रियता तेजी से बढ़ रही है और अमेरिका वहां अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र भविष्य की सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनने जा रहा है और ग्रीनलैंड इस पूरे क्षेत्र की चाबी है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि जो देश इस अमेरिकी सोच के साथ नहीं आएंगे, उन्हें आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

हम आपको बता दें कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ग्रीनलैंड न तो बिकाऊ है और न ही किसी दबाव में सौंपा जा सकता है। ग्रीनलैंड के स्थानीय प्रशासन ने भी अमेरिका की इस सोच को खारिज करते हुए कहा है कि वहां के लोग अपने भविष्य का फैसला खुद करेंगे। वहीं यूरोप के कई देशों ने डेनमार्क के समर्थन में बयान दिए हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता के खिलाफ बताया है। साथ ही ट्रंप की टैरिफ धमकी को कई देशों ने आर्थिक जबरदस्ती करार दिया है। ट्रंप के ताजा बयान के बाद ट्रांस अटलांटिक रिश्तों में तनाव साफ दिखाई देने लगा है और नाटो के भीतर भी असहजता बढ़ती नजर आ रही है। देखा जाये तो डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर दिया गया बयान एक ऐसी राजनीति को उजागर करता है जिसमें कूटनीति नहीं बल्कि धमकी हथियार बन चुकी है।

ग्रीनलैंड क्यों अहम है यदि इसकी बात करें तो आपको बता दें कि यह कोई साधारण बर्फीला द्वीप नहीं है। यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित एक ऐसा भूभाग है जहां से उत्तरी अटलांटिक पर नजर रखी जा सकती है। यहां दुर्लभ खनिज संसाधन हैं। यहां से मिसाइल चेतावनी प्रणाली, नौसैनिक गतिविधियां और वायु मार्ग नियंत्रित किए जा सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका इसे केवल आर्थिक नहीं बल्कि सैन्य नजरिये से भी देखता है। लेकिन सवाल यह नहीं है कि ग्रीनलैंड कितना महत्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि क्या किसी देश को यह अधिकार है कि वह अपनी सामरिक जरूरतों के नाम पर दूसरे देशों पर आर्थिक दबाव बनाए। ट्रंप का बयान इसी सोच की खतरनाक मिसाल है।

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