January 25, 2026

आधुनिक युग में विश्वसनीय डेटा की भूमिका महत्वपूर्ण – उपायुक्त

डेटा संग्रह तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से होटल हॉलिडे होम में कार्यशाला का आयोजन

शिमला, हिमाचल प्रदेश सरकार के अर्थशास्त्र एवंसांख्यिकी विभाग द्वारा भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(डवैच्प्) द्वारा प्रायोजित सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण के लिए सहायता योजना के तहत, बेहतर समन्वय और सांख्यिकीय गतिविधियों में देरी से बचने व डेटा संग्रह तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आज होटल हॉलिडे होम शिमला में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में प्रदेश सरकार के आर्थिक सलाहकार विनोद राणा तथा अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंघल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों और प्रमुख हितधारकों ने कार्यशाला में भाग लिया।
कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने विश्वसनीय डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि डेटा-आधारित निर्णय ज्यादा सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद होते हैं, जिससे विभाग परफॉर्मेंस का आकलन कर पाते हैं। उन्होनें कहा कि कार्यशाला में हो रही चर्चा का मुख्य उद्देश्य साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने और सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डेटा समन्वय, संग्रह, विश्लेषण और प्रसार में सुधार करके राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि संसाधनों को कुशलता से आवंटित करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना बहुत आवश्यक है, जहाँ पॉलिसी इंटरवेंशन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कच्चे डेटा को सार्थक जानकारी में बदलना, जो जमीनी स्तर के काम को टॉप लेवल पर दिखाता है, समय पर डेटा फीडिंग और लगातार जांच सुनिश्चित करता है और कुल मिलाकर गवर्नेंस के नतीजों को बेहतर बनाता है।
अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंघल ने डेटा को राज्य के भीतर आधिकारिक संरचना के निर्माण के लिए नए ईंधन के रूप में बताया ताकि जनता का जीवन आसान हो सके।
आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने डेटा तंत्र के महत्व को बताते हुए कहा कि यह डेटा में देरी को कम करता है और गुणवत्तापूर्ण और वास्तविक डेटा तैयार करके नीतियों को बनाने में मदद करता है, जिससे जनता का जीवन आसान होता है। उन्होंने प्रभावी योजना, निगरानी और मूल्यांकन का समर्थन करने के लिए जमीनी स्तर पर सांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डेटा की प्रामाणिकता और यथार्थवाद के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने सभी डेटा-उत्पादक विभागों से सटीकता और सत्यापन के उच्चतम मानकों का पालन करने का आग्रह किया, विशेष रूप से परिष्कृत जिला घरेलू उत्पाद अनुमानों की तैयारी और शासन और विकास योजना में उनके राजनीतिक उपयोग पर जोर दिया।उप निदेशक सुरेश वर्मा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए आर्थिक और सांख्यिकी विभाग द्वारा जनता की भलाई, राज्य और राष्ट्र की भलाई हेतु स्टीक डेटा के महत्व पर जोर दिया। जिला सांख्यिकी कार्यालय, शिमला जिला की प्रोफाइल का ओवरव्यू प्रस्तुत किया।
जिला सुशासन सूचकांक पर एक प्रेजेंटेशन सुरेश चंद वर्मा, उप निदेशक, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी द्वारा दिया गया, जबकि विभाग के राज्य आय अनुभाग ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद के अनुमान के लिए डेटा आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के टेक्निकल सेशन में तीन पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन शामिल रहे। ओपन हाउस चर्चा ने प्रतिभागियों को अपनेअनुभव साझा करने, मुद्दे उठाने और अंतर-विभागीय समन्वय बढ़ाने और सांख्यिकीय प्रक्रियाओं में सुधार के लिए नवीन उपायों का सुझाव देने के लिए एकमंच प्रदान किया।
मुख्य अवधारणाओं को मजबूत करने, सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने और प्रतिभागियों के बीच अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक इंटरैक्टिव सांख्यिकीय क्विज भी आयोजित किया गया था।
वर्कशॉप का समापन एक फीडबैक सेशन के साथ हुआ, जिसके दौरान प्रतिभागियों ने भविष्य की सांख्यिकीय पहलों को मजबूत करने के लिए अपने अवलोकन और मूल्यवान सुझाव साझा किए।
संयुक्त निदेशक, आर्थिक और सांख्यिकी विभाग अनुपम शर्मा ने राज्य में एक मजबूत, विश्वसनीय और उत्तरदायी सांख्यिकीय प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए निरंतर अंतर-विभागीय सहयोग और क्षमता-निर्माण पहलों के महत्व पर जोर दिया।
कार्यशाला में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन से सम्बन्धित समस्त अधिकारियों ने भाग लिया।

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