January 25, 2026

हिमाचल का अन्यायपूर्ण टोल टैक्स बना लोगों की बड़ी समस्या

इंटक ने जताया तीखा रोष

शिवांकुर शर्मा, नंगल, एक बार फिर नंगल की सीमा से लगे हिमाचल प्रदेश के टोल टैक्स नाकों पर हो रही धक्‍केशाही के खिलाफ आवाज बुलंद हुई है। बीबीएमबी की मान्यता प्राप्त यूनियन नंगल भाखड़ा मज़दूर संघ इंटक व सांझा मोर्चा ने भाखड़ा मार्ग पर वसूले जा रहे 70 रुपये के एंट्री टैक्स को अन्यायपूर्ण करार देते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने साफ कहा कि यह टैक्स कर्मचारियों व स्थानीय नागरिकों के साथ सीधा अन्याय है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यूनियन ने बताया कि नंगल से भाखड़ा तक जाने वाला यह मार्ग बीबीएमबी ने ही बनाया है व इसका रखरखाव भी पूरी तरह से बीबीएमबी करती है। इसके बावजूद कर्मचारियों से टैक्स वसूलना तर्कहीन व जनविरोधी है। नंगल व भाखड़ा के बीच दूरी महज पांच से सात किलोमीटर की है, फिर भी हर बार बरमला स्थित टोल बैरियर पर 70 रुपये देना मजबूरी है। कई कर्मचारी दिन में दो से तीन बार इस मार्ग से गुजरते हैं जिससे आए दिन झगड़े व विवाद की नौबत तक आ जाती है।

इंटक के प्रधान सतनाम सिंह लादी ने कहा कि इस मामले को पहले भी उपायुक्त बिलासपुर, एसडीएम नैना देवी व बीबीएमबी प्रबंधन के समक्ष रखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस सड़क का निर्माण व देखभाल बीबीएमबी कर रही है, उस पर बीबीएमबी कर्मचारियों से टोल लेना न केवल अन्याय है बल्कि संबंधों व भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

प्रदर्शन में कार्यकारी प्रधान विनोद कुमार राणा, महासचिव मनोज वर्मा, सीनियर उप प्रधान परमजीत सिंह राणा, उप प्रधान अशोक शर्मा, रमेश चंद्र, सुनील कुमार, राम गोपाल, भूपिंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। इन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से अपील की कि बीबीएमबी कर्मचारियों व नंगल के पांच किलोमीटर दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को टोल टैक्स से तुरंत छूट दी जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। यूनियन ने कहा कि भारत सरकार के सड़क, परिवहन व राज मार्ग मंत्रालय की नई टोल नीति के अनुसार न्यायपूर्ण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। यदि स्थानीय लोगों को छूट दी जाती है तो इससे हिमाचल के राजस्व को कोई घाटा नहीं होगा, बल्कि कारोबार बढ़ने से सरकार को टैक्स के रूप में अतिरिक्त आय ही होगी।

इंटक ने स्पष्ट किया कि हिमाचल व पंजाब के बीच मजबूत संबंध बनाए रखने के लिए सरकार को तत्काल जनहित में इस अन्यायपूर्ण टोल नीति में बदलाव करना चाहिए।

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