हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को खानी चाहिए ये 5 रोटियां
स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद
हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप एक ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकती है, खासतौर पर दिल, किडनी और दिमाग पर। ऐसे में बीपी के मरीजों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। वहीं, रोजाना के खाने में रोटी आम लोगों का प्रमुख दैनिक भोजन होती है। ऐसे में अगर आप अपनी थाली में रोजाना के गेहूं की रोटी के अलावा कुछ बदलाव करें, तो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखा जा सकता है। इस लेख में हम ऐसी 5 रोटियों के बारे में बता रहे हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं और बीपी को कंट्रोल में रखने में मदद कर सकती हैं।गेहूं, जौ, रागी, सोयाबीन और अन्य अनाजों के मिश्रण से बनी मल्टीग्रेन रोटी पोषक तत्वों का खजाना है। इसमें हाई फाइबर होने की वजह से यह लंबे समय तक पेट भरा रखती है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक होती है।रागी यानी नाचनी या रेड मिलेट, कैल्शियम का पावरहाउस है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ दिल की सेहत को भी सपोर्ट करती है। शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकने का गुण इसमें पाया जाता है, जिससे हाई बीपी के मरीजों को राहत मिल सकती है।ओट्स में पाया जाने वाला खास फाइबर कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करता है और दिल के लिए प्रोटेक्टिव शील्ड का काम करता है। ओट्स की रोटी हल्की होती है और जल्दी डाइजेस्ट हो जाती है, इसलिए हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए यह एक बढ़िया विकल्प है।क्विनोआ को सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये मिनरल्स ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।सर्दियों में खूब खाई जाने वाली मक्के की रोटी स्वाद में लाजवाब होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करते हैं और हृदय को मजबूत बनाते हैं।ज्वार को नेचुरल ग्लूटेन-फ्री माना जाता है और यह फाइबर से भरपूर होती है। इसका सेवन पाचन को दुरुस्त रखता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में मदद करता है। गेहूं की रोटियों से जिन्हें भारीपन महसूस होता है, उनके लिए ज्वार की रोटी एक हल्का और सेहतमंद विकल्प है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधित समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
