February 20, 2026

बीएलए ने आईइडी ब्लास्ट से 10 पाक सैनिक मारे

टीटीपी ने नॉर्थ ब्लॉक की दी धमकी, भारत बोला- रूको जरा, सब्र करो

नई दिल्ली: आपने वह पुरानी कहावत बहती गंगा में हाथ धोना तो जरुर सुना होगा। भारत के पश्चिम में जो गंदगी है, उसे साफ करने के लिए गंगा जी निकल रही है। जी हां, इसे आप इसलिए लिहाज से देख सकते हैं की भारत पाकिस्तान के मिलिट्री स्टैब्लिस्मेंट की सफाई करने वाली है। वहीं कई और दावेदार भी इसमें शामिल होते नजर आ रहे हैं जो खुलकर कह रहे हैं कि हम भी इस सफाई अभियान में साथ देने वाले हैं। बीएलए यानी बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान को पैरालाइज कर दिया है और दर्जन भर से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों कि पिछले 24 घंटे में मारे जाने की खबर सामने आ रही है। दूसरी तरफ तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी कह रहा है कि हम तो नॉर्थ से पाकिस्तान को काटने वाले हैं। ऐसे रिपोर्ट्स आ रहे हैं जिसके द्वारा कुछ रूट्स हैं जहां पर टीटीपी अपने आप को मजबूत करके बैठी है और पाकिस्तान की आर्मी इस बात को नजरअंदाज कर रही है। पाकिस्तान आर्मी ट्रूप्स की डेप्लॉयमेंट कर रही है पंजाब बॉर्डर की ओर। वैसे ही आप देख तो सेना के ट्रूप्स को जम्मू बॉर्डर की ओर लेकर जाना चाह रहे हैं। तो ऐसे कुछ रूट्स हैं जहां पर टीटीपी इस प्रकार से बैठी है कि पाकिस्तान की आर्मी वहां जाने से डर रही है।बलोच लोकेशन आर्मी ने दावा किया है कि उसने क्वेटा के मार्गेट इलाके में पाकिस्तान सेना पर हमला करके उसके दर्जन भर जवानों को मार दिया है। बला के मुताबिक यह हमला रिमोट कंट्रोल्ड इम्प्रोवाइजड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईइडी) के जरिए किया गया है जिसमें सेना का वाहन पूरी तरह से तबाह हो गया है। यह इलाका लंबे समय से बलूच विद्रोहियों की गतिविधियों का केंद्र रहा है। हमले को लेकर पाकिस्तान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आपको बता दे की बलोच लिबरेशन आर्मी पिछले कई वर्षों से आजादी की मांग को लेकर हथियारबंद संघर्ष कर रही है। इससे पहले 11 मार्च को कोटा से पेशावर जा रही जफर एक्सप्रेस को बलोच लिब्रेशन आर्मी की तरफ से बंधक बना लिया गया था। इस अटैक के लिए बीएलए ने अपने घातक लड़ाके मजीद बिग्रेड और फतेह को तैयार किया था। पाकिस्तान के आसिफ मुनीर के सारे दांव उल्टे पड़ते हुए नजर आ रहे हैं। आसिम मुनीर का प्लांन था की एंटी इंडिया एलिमेंट अपने लोगों में फैलने से एक शार्ट वॉर हो जाये। फिर लोगों का भरोसा पाकिस्तान आर्मी पर पुनः स्थापित हो जाएगा। इस वक्त अगर आप देख तो पाकिस्तान आर्मी पर चाहे वह आम नागरिक हो या फिर कोई और भरोसा तो बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने सोचा कि भारत विरोधी भावना को भड़काने से पाकिस्तानी लोगों का भरोसा फिर से जीतने में मदद मिलेगी। अभी अगर देखा जाए तो पाकिस्तानी सेना से लगभग सभी संस्थाएँ नफरत करती हैं। फिर चाहे वो पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) समर्थक हो, पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम), बलूच राष्ट्रवादी और विद्रोही बीएलए या फिर टीटीपी। यानी ऐसी मुनीर का जो दांव था वह पूरा का पूरा उल्टा पड़ता दिख रहा है। आकर देखा जाए तो पाकिस्तान ने मानव अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है और उसने भारत के खिलाफ नापाक हरकत करने के लिए गलत वक्त चुन लिया है। वैसे भी अगर अमेरिका में बाइडेन सरकार होती तो पाकिस्तान को थोड़ी बहुत राहत तो मिल ही सकती थी। लेकिन ट्रंप प्रशासन की ओर से रात मिलन तो दूर की बात है अमेरिका खुले तौर पर भारत के साथ खड़ा नजर आ रहा है।रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि भारत, पाकिस्तान में हमलों के लिए प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को हथियार मुहैया करा रहा है। एआरवाई न्यूज के कार्यक्रम में बोलते हुए ख्वाजा आसिफ ने तालिबान को ‘भारतीय एजेंट’ बताया और कहा कि नई दिल्ली पाकिस्तानी धरती पर आतंकी हमलों की तैयारी कर रही है। आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के पास विश्वसनीय खुफिया जानकारी है, जो टीटीपी के जरिए हमलों की साजिश रचने में भारत की संलिप्तता का संकेत देती है। पकिस्तान के मंत्री ने कहा कि भारत टीटीपी के आतंकवादियों को आईईडी और अन्य हथियार मुहैया करा रहा है, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान के प्रमुख शहरों को निशाना बनाना है। अब भला पाकिस्तान को ये कौन बताए कि भारत को टीटीपी को हथियार देने की क्या जरूरत पड़ गयी, उसके खुद के बगल में अफगानिस्तान है जहां अमेरिका ने हथियारों का पूरा जखीरा छोड़ कर रखा है। वैसे पाकिस्तान में डिफेंस मिनिस्टर की तो कोई आवश्यकता ही नहीं है, सबकुछ तो आर्मी ही करती है। ऐसे में रक्षा मंत्री दिवालियापन में इस तरह के बयान देते रहते हैं। अफगानिस्तान के एक विशिष्ट मिलिशिया समूह लिबरेशन फ्रंट ने पाकिस्तान पर हमला करने और अटक तथा उससे आगे तक के क्षेत्र पर कब्जा करने की अपनी मंशा की घोषणा की है। यानी जब भारत पाकिस्तान पर हमला कर रहा होगा तो मिलिशिया समूह भी उसी मौके का फायदा उठाकर अटक और उसके आसपास के इलाकों को कब्जा करेंगे। उनका मतलब डोरंड लाइन से है। डूरंड रेखा, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा है, जो विवाद का विषय है और इसने पश्तून राष्ट्रवाद और विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों को बढ़ावा दिया है। 1893 में स्थापित इस रेखा ने पश्तून आदिवासी क्षेत्रों को विभाजित किया, जिसके कारण दोनों पक्षों में विवाद और निराशा बनी रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *