28 अप्रैल को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी जिला मंडी के 7 स्थानों पर होने वाले किसानों के प्रदर्शन को पूरा समर्थन देगी
मंडी, अजय सूर्या : मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की मंडी जिला कमेटी की मंडी में हुई बैठक में किसानों की जमीन से बेदखली, तालबंदी, भूमि अधिग्रहण और आपदा राहत के मुद्दे पर जारी प्रदेश भर में किसान बागवान आंदोलन को पूरा समर्थन दिया है। 28 अप्रैल को जिला मंडी के 7 स्थानों पर उपमंडल व तहसील अथवा ब्लॉक स्तर पर होने वाले किसानों के प्रदर्शनों को भी पार्टी अपना पूरा समर्थन व सहयोग करेगी। जिला कमेटी ने 20 मई की प्रस्तावित अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन हड़ताल को भी पूरा समर्थन दिया है। यह जानकारी देते हुए पार्टी के जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि पूरे जिला में आवश्यक सेवाओं चरमर्रा गई हैं। सड़कों की हालत खराब है, सार्वजनिक बसों की भारी कमी है, कई जगह पीने के पानी का संकट है, अस्पतालों में डॉक्टर व अन्य स्टाफ की कमी है तो वहीं कई स्कूलों में ताले लटकाए जा रहे हैं और कई स्कूल अध्यापकों की भारी कमी झेल रहे हैं। सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग पर तथा चिट्टे के खिलाफ जनता को जागरूक करते हुए माकपा पूरे जिला में अभियान व आंदोलन चलाएगी।
जिला कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के केन्द्रीय कमेटी सदस्य ओंकार शाद ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार और प्रदेश की काँग्रेस सरकार जनविरोधी नव उदारवादी नीतियाँ लागू कर रही हैं, जिस कारण बेरोजगारी, महंगाई व भूखमरी बढ़ रही है। आम जनता की सुविधाएं व सबसीडियाँ छीनी जा रही हैं। सेवाओं का निजीकरण किया जा रहा है और उन पर टैक्स लगा कर महंगा किया जा रहा है। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की केंद्र सरकार असल में सांप्रदायिक और कॉर्पोरेट गठजोड़ की सरकार है। भाजपा की केंद्र सरकार एक तरफ जनता पर आर्थिक बोझ लाद रही है, बेरोजगारी व महंगाई बढ़ा रही है और वहीं अपने सांप्रदायिक अजेंडे को लागू कर रही है। लोकतन्त्र को कमजोर किया जा रहा है और ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश भी इस समय गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। यह प्रदेश में भाजपा और काँग्रेस सरकारों की नव उदारवादी नीतियों और केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सहायताओं को रोकने के चलते हुआ है। एक तरफ हिमाचल का स्पेशल राज्य का दर्जा छीन लिया वहीं अन्य प्रकार की सहायता जो केंद्र से मिलती थी उसे भी छीन लिया है।
प्रदेश सरकार चुनाव से पहले दी गई 10 गारंटियों को लागू करने में विफल रही है। प्रदेश भर में कोर्ट कचहरी का हवाला दे कर लंबे समय से हर सरकार के दौरान प्रदेश के किसानों की बेदखली हो रही है, घर तोड़े गए हैं, तालाबंदी हो रही है जिसका माकपा विरोध करती है। माकपा की मांग है कि 5 बीघा भूमि हर किसान की नियमित की जाये। बेदखली व तालबंदी पर रोक लगाई जाये, 1980 के वन सारंक्षण कानून को बदला जाये। किसानों को नियमित जमीन देने बारे प्रदेश सरकार नीति बनाए और केंद्र सरकार हिमाचल की वन भूमि को हिमाचल के हवाले करे।
बैठक में जिला कुशाल भारद्वाज, भूपेन्द्र सिंह, महेंद्र राणा, सुरेश सरवाल, राजेश शर्मा, वीना वैद्य, भीम सिंह, रवि कान्त, बिहारी लाल, गुरदास वर्मा, जगमेल ठाकुर, गोपेंद्र कुमार, संजय जमवाल, इन्द्र सिंह, ऋत्विक ठाकुर आदि ने भी हिस्सा लिया।
