प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 65 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्ड बांटे
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 65 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्ड बांटे। वर्चुअल कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, आज का दिन गांवों और अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक है। पांच साल पहले शुरू हुई यह योजना ग्रामीणों को उनके घर और जमीन का कानूनी प्रमाण देने के लिए बनाई गई थी। यह कदम ग्रामीण विकास के साथ-साथ संपत्ति पर अधिकार को मजबूत करने के लिए उठाया गया।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा, ‘दुनिया के कई देशों में गरीबी दूर करने के लिए प्रॉपर्टी राइट्स को अहम बताया गया है। हमने इस दिशा में सवा 2 करोड़ दस्तावेज बांटकर बड़ा कदम उठाया है। पहले ग्रामीणों के पास उनकी संपत्ति के पक्के दस्तावेज नहीं थे, जिससे उनकी संपत्ति का आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता था। लेकिन हमारी पहल से अब गांव के लोगों के पास भी संपत्ति के दस्तावेज मिल गए हैं, जिससे उनका फायदा हुआ है।
पीएम मोदी ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत देश के 6 लाख से ज्यादा गांवों में ड्रोन के जरिए जमीन और घरों की मैपिंग की जा रही है। अब तक आधे से ज्यादा गांवों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस योजना ने ग्रामीणों को न केवल कानूनी सुरक्षा दी है बल्कि उन्हें अपनी संपत्ति के जरिए लोन लेकर छोटे-बड़े व्यापार शुरू करने का मौका भी दिया है।
पीएम मोदी ने कहा कि कानूनी दस्तावेजों की उपलब्धता ने 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक गतिविधियों का मार्ग प्रशस्त किया है। अब तक 23 करोड़ भू-आधार नंबर जारी किए गए हैं, जिससे हर प्लॉट की पहचान करना आसान हो गया है। इसके अलावा, 98 प्रतिशत लैंड रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार सीमांत गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। वाइब्रेंट योजना के तहत 2 लाख से ज्यादा पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ा गया है। पीएम ने यह भी बताया कि 5 लाख से ज्यादा नए कॉमन सर्विस सेंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा, किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए 12 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है।
स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3 लाख से अधिक गांवों में सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। 1 लाख 44 हजार से अधिक कार्ड बनाए गए हैं, जिनमें से 1 लाख 13 हजार से ज्यादा कार्ड बांटे जा चुके हैं। इस योजना ने ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देकर विवादों को कम किया है और बैंकों से लोन लेना आसान बनाया है।
