February 19, 2026

क्या हिंदुओं के लिए अब ‘सुरक्षित’ नहीं रह गया है कनाडा

एकजुट हो रहे हिंदुओं ने मंदिर के बाहर लगाए ‘बटोगे तो कटोगे’ के नारे

कनाडा के ब्रैम्पटन में खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा हिंदू सभा मंदिर पर किए गए हमले से कनाडा सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगना स्वाभाविक है। क्योंकि हिंदू मंदिरों पर खालिस्तान समर्थकों द्वारा अक्सर हमले करने की घटनाएं सामने आती रहती है लेकिन वहां की ट्रूडो सरकार इन हमले को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने से परहेज करती नजर आई है। ऐसे में अब प्रश्न उठने लगा है कि क्या कनाडा अब हिंदुओं के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है? कनाडा में खालिस्तान चरमपंथी जिस तरह आए दिन भारतीय झंडे का अपमान करते हैं या फिर हिंदू मंदिरों या हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, ऐसे में इस तरह का प्रश्न उठना स्वाभाविक है। भले ही हिंदू सभा मंदिर पर हुए हमले को लेकर वहां के राजनेताओं ने व्यापक निंदा की है लेकिन इसमें भी शक नहीं की अब तक खालिस्तानी चरमपंथियों के विरुद्ध किसी तरह का भी कदम उठाने में ट्रूडो सरकार गंभीर नजर नहीं आई है। ताजा जानकारी के अनुसार कनाडा में हुए हिंदू सभा मंदिर पर हमले से जुड़े मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है लेकिन अभी तक उन लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन इस हमले के बाद अब कनाडा में रह रहे हिंदू भी एकजुटता का प्रदर्शन करने लगे हैं। कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर के बाहर भारतीयों ने ‘बटोगे तो कटोगे’ के नारे लगाए और भारतीयों से विशेष रूप से हिंदुओं से एकजुट होने की अपील भी की।

भले ही भारत और कनाडा के रिश्ते अब तक के सबसे बुरे दौर में हैं। फिर भी इस तरह की घटनाएं वहां की सरकार की निष्पक्षता की पोल तो खोलते ही है। भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य ने इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया और कहा कि खालिस्तानी चरमपंथियों को खुली छूट मिल रही है। सांसद चंद्र आर्य ने कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों की हिंसा की बात कही है। घटना का वीडियो भी सांसद ने शेयर किया है, जिसमें कुछ लोग परिसर में प्रवेश कर वहां मौजूद लोगों पर हमला कर रहे हैं।

सांसद चंद्र आर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे लगने लगा है कि उन रिपोर्ट्स में थोड़ी सच्चाई है, जिनमें कहा जा रहा है कि कनाडा की राजनीति के अलावा खालिस्तानियों ने हमारे कानून प्रवर्तन एजेंसियों में घुसपैठ कर ली है। इस बात में कोई आश्चर्य नहीं है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कनाडा में खालिस्तानियों को खुली छूट मिल रही है।”

सांसद चंद्र आर्य ने कहा कि जैसा मैं काफी समय से कह रहा हूं कि हमारे समुदाय की सुरक्षा के लिए हिंदू कनाडाई को खड़ा होना होगा और अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा। चंद्र आर्य ने कहा कि राजनेताओं को जवाबदेही तय करनी होगी।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर में हिंसा की घटना स्वीकार्य नहीं है। हर कनाडाई को सुरक्षित माहौल में खुलकर अपने धर्म का पालन करने की आजादी है। समुदाय की सुरक्षा करने और घटना की जांच के लिए तत्काल कार्रवाई करने के लिए पील रीजनल पुलिस का धन्यवाद।”

भले ही भारत और कनाडा के रिश्ते पिछले काफी समय से खराब चल रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि कनाडा सरकार अपने ही नागरिकों में भेदभाव करे। एक तरफ कनाडा लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की दुहाई देता है लेकिन दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं सरकार के नजरिए पर संदेह पैदा करती है।

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