हरियाणा हार के बाद कांग्रेस को आंख दिखाने लग पड़े इंडी गठबंधन के सहयोगी दल
नई दिल्ली: हरियाणा में कांग्रेस को जिस जीत की उम्मीद थी वो तो उसे मिली नहीं लेकिन हार के बाद कांग्रेस पर राजनीतिक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक तरफ शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि कांग्रेस को इन नतीजों से सबक लेने की जरूरत है। शिवसेना ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को पता है कि जीत को हार में कैसे बदलना है।
शिवसेना ने कहा कि कांग्रेस ने हरियाणा में आम आदमी पार्टी और अन्य दलों से गठबंधन नहीं किया इसलिए उसे हार का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ हरियाणा में कांग्रेस की हार के एक दिन बाद अखिलेश यादव ने यूपी की 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को देखते हुए 6 सीटों पर सपा उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दी हैं। कहा जा रहा है कि सपा के इस फैसले से कांग्रेस नाराज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने उम्मीदवारों के नाम घोषित करने से पहले उनसे बातचीत नहीं की। कांग्रेस सपा के साथ मिलकर यूपी में उपचुनाव लडऩा चाहती थी। अखिलेश ने करहल, कटेहरी, मिल्कीपुर, सीसामऊ, फूलपुर और मझवां सीट पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। कांग्रेस इन 6 में से 2 सीटों पर लडऩा चाहती थी।
दरअसल हरियाणा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस को शिकस्त मिली है इससे सहयोगी पार्टियों में उसके बढ़ते दबदबे को प्रभावित करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ ही दिनों बाद महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव हैं। दोनों ही जगह कांग्रेस को अपने सहयोगी पार्टियों से सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय करना है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि इस सीट शेयरिंग पर कांग्रेस अपनी मनमर्जी नहीं कर पाएगी। वहीं आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में अकेले विधानसभा चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है।
