हरियाणा: किसानों और पहलवानों की जमीं पर कांग्रेस और 4 लालों का रहा है आधिपत्य
चंडीगढ़, हरियाणा (Haryana) में 1966 से लेकर 2024 तक 4 लालों का आधिपत्य रहा है। देवीलाल, बंसीलाल, भजनलाल (Devilal, Bansilal, Bhajanlal) व मनोहर लाल (Manohar Lal)। इनमें से मनोहर लाल पीएम के काफी नजदीक रहे। हरियाणा के वह चौथे लाल हैं, जिन्हें हरियाणा में मुख्यमंत्री (Chief Minister) का ताज मिला। हरियाणा (Haryana) में कभी तीन लालों के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजाने वाले कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) 2005 से लेकर 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। हुड्डा ने तब तीन लालों देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के खिलाफ लाल हटाओ, हरियाणा बचाओ अभियान चलाया था। उन्होंने तब यह कल्पना नहीं की होगी कि हरियाणा में इन तीन लालों के बाद चौथे लाल भाजपा के मनोहर लाल भी बन सकते हैं। हुड्डा के लाल विरोधी अभियान में तत्कालीन मंत्री कर्नल राम सिंह, शमशेर सिंह सुरजेवाला, चौधरी बीरेंद्र सिंह, राव इंद्रजीत सिंह आदि को साथ लेकर कांग्रेस में रहते हुए भजनलाल के खिलाफ मुहिम चलाई और वह अपनी मुहिम में सफल भी रहे। अब हरियाणा की 15वीं विधानसभा के गठन की प्रक्रिया में 5 अक्टूबर को मतदान होना है। मतदाता 5 अक्टूबर को मतदान करेंगे और 8 अक्टूबर को मतगणना होगी। दशहरे से पूर्व हरियाणा की नई सरकार के गठन की संभावना है।
54 से 81 और फिर 90 हुई विधानसभा सीट
1966 में हरियाणा गठन के बाद विधानसभा का पहला चुनाव 1967 में हुआ। उस समय में विधानसभा की 81 सीट के लिए चुनाव हुआ था। पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की। उस समय पंडित भगवत दयाल शर्मा प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। एक साल बाद ही 1968 में फिर से हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भी कांग्रेस ने फिर से 81 में से 48 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 81 में से 52 सीटों पर जीत दर्ज की। 1977 में हुए हरियाणा में पहली बार 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए। इस चुनाव में जनता पार्टी ने 75 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस केवल 3 सीट पर सिमट गई। इसके बाद 1982 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 36 और लोकदल ने 31 सीटों पर जीत दर्ज की। 1987 के विधानसभा चुनाव में लोकदल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 60 सीटों पर जीत हासिल की। इसी प्रकार से 1991 में कांग्रेस ने 51, 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी ने 33 और बीजेपी ने 11 सीट हासिल कर हरियाणा में गठबंधन की सरकार बनाई। इसके बाद 2000 में इनैलो ने 47, 2005 में कांग्रेस ने 67, 2009 में कांग्रेस ने 40 सीटों पर जीत दर्ज की। 2009 में कांग्रेस ने हजकां के विधायकों को तोडक़र फिर से भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में सरकार बनाई। 2014 में बीजेपी ने पहली बार हरियाणा में अपने दम पर 47 सीट हासिल की और अकेले सरकार बनाई। 2019 में बीजेपी ने 40 सीट हासिल की और जेजेपी के सहयोग से गठबंधन की सरकार बनाई।
यह बने थे पहले मुख्यमंत्री
भगवत दयाल शर्मा हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री बने थे। उस वक्त राज्य में विधानसभा की 54 सीटें थी जो 1967 में बढक़र 81 और 1977 में 90 हो गईं। हरियाणा की पहली विधानसभा में कांग्रेस बहुत मजबूत थी। तब 54 विधायकों में से 48 विधायक कांग्रेस के थे, तीन भारतीय जनसंघ, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का एक और दो विधायक निर्दलीय थे।
बंसीलाल, देवीलाल व भजनलाल के नाम रहा 1970 का दशक
1968 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बंसीलाल को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। बंसीलाल जाट समुदाय से आते थे और भिवानी के रहने वाले थे। 1969 में कांग्रेस में जबरदस्त टूट हुई लेकिन बंसीलाल मुख्यमंत्री बने रहे और 30 नवंबर 1975 तक मुख्यमंत्री के पद पर काम करते रहे। जब बंसीलाल केंद्र की राजनीति में चले गए तो बंसीलाल की जगह पर भिवानी के एक अन्य नेता बनारसी दास गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया गया। 1977 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने बनारसी दास गुप्ता की सरकार के साथ ही अन्य राज्यों की कांग्रेस सरकारों को भी बर्खास्त कर दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। राष्ट्रपति शासन के बाद जब विधानसभा चुनाव हुए तो जनता पार्टी की जीत हुई और सिरसा के जाट नेता देवीलाल मुख्यमंत्री बने, लेकिन उसे दौरान एक यादगार वाकया और हुआ। जून, 1979 में भजनलाल जो देवीलाल की सरकार में मंत्री थे, वह कुछ असंतुष्ट विधायकों को लग्जरी बस और कारों के काफिले के साथ अलवर, कोटा, आगरा, ग्वालियर, भोपाल, कानपुर, कोलकाता और मुंबई ले गए। दो हफ्ते से ज्यादा वक्त तक यह सभी विधायक बड़े होटलों और रिसॉर्ट में ठहरे। सरकार की अस्थिरता को देखते हुए देवीलाल ने इस्तीफा दे दिया और 29 जून 1979 को भजनलाल मुख्यमंत्री बने।
