February 19, 2026

हिमाचल विधानसभा में 6 विधायकों के सिर कलम करने के बयान पर जबरदस्त हंगामा

शिमला: हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान उठा सियासी सैलाब अभी शांत नहीं हुआ है। मानसून सत्र के चौथे दिन सदन में विधानसभा अध्यक्ष के छह विधायकों के ‘सिर कलम करने और तीन का सिर आरे के नीचे होने’ के बयान पर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्यों ने खासा हंगामा किया और बाद में सदन से बर्हिगमन किया।

विपक्षी भाजपा विधायक इंद्र दत्त लखनपाल ने सदन में पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत यह मामला उठाया। उन्होंने अध्यक्ष से इस बयान पर खेद प्रकट करने की मांग की, जिसे अध्यक्ष ने खारिज कर दिया। इसपर अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा,‘‘मैंने सदन में ऐसा कोई बयान नहीं दिया, जिसके लिए खेद प्रकट करूं।’’इस पर सदन में विपक्ष ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पठानिया ने संवैधानिक पद पर बैठ कर गैर जिम्मेदाराना बयान दिया था, जिस पर विधायकों ने सदन में मामला उठाया। लेकिन विपक्ष की बात सुनने के बजाय कहा कि उनकी सीखने की उम्र नहीं है और जो कहा है वह ठीक है। पठानिया अहंकारी हो गए हैं और खुद को सर्वज्ञाता बता रहे हैं। जैसे उन्हें ही नियमों का ज्ञान है और बाकी विधायक पहली बार सदन की कार्यवाही में भाग ले रहे हैं। विपक्ष के कई विधायक चार से पांच बार जीत कर सदन में पहुंचे हैं और 28 साल मुझे भी विधानसभा में हिस्सा लेते हुए हो गए हैं।

वहीं सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष द्वारा उठाए मुद्दे पर सदन में निंदा प्रस्ताव लाया और विपक्ष के आरोपों की निंदा की। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने हिमाचल में ‘मिशन लोटस’ चलाया, जिसे प्रदेश की जनता ने जवाब दे दिया है। ऐसे में अब विपक्ष को अपनी भूमिका को निभाने का कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी विधानसभा अध्यक्ष के बयान को जायज ठहराते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने जो कहा है उसमें कुछ गलत नहीं है।

वहीं पठानिया ने कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों से चलती है और सदन के भीतर उन्होंने कभी इस तरह की बात नहीं कही। सदन के बाहर मेरा अलग दायित्व है और नेता विपक्ष ठाकुर उन्हें नहीं सिखाएंगे कि क्या करना है और क्या नहीं। श्री ठाकुर को जवाब देने के लिए वह बाध्य नहीं हैं बल्कि उनकी जवाबदेही सदन के प्रति है। पठानिया ने विधानसभा सत्र के दौरान कोई भी राजनीतिक बयान देने से इनकार किया, और जोर दिया कि सदन के भीतर उनकी भूमिका गैर-पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विधानसभा के बाहर उन्हें राजनीतिक राय व्यक्त करने का अधिकार है। उन्होंने विशेषाधिकारों का उल्लंघन किए बिना सदन के बाहर राजनीतिक बयान देने की अपनी क्षमता का समर्थन करने वाले कानूनी उदाहरणों का हवाला दिया।

इस प्रतिक्रिया से विपक्षी सदस्यों में आक्रोश फैल गया और वे नारे लगाने लगे और कार्यवाही बाधित करने लगे। सदन के नियमों का पालन करने की अध्यक्ष की चेतावनी के बावजूद, विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा, अंततः अध्यक्ष को केवल 20 मिनट के बाद दोपहर के भोजन के लिए सत्र स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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