12वीं की किताब से हटा बाबरी विध्वंस का चैप्टर, एनसीईआरटी प्रमुख ने बताई इसके पीछे की वजह
नई दिल्ली : एनसीईआरटी की कक्षा 12 की पॉलिटिकल साइंस (राजनीति विज्ञान) की अपडेटेड किताब में बाबरी मस्जिद का नाम हटा दिया गया है और इसे तीन गुंबद वाली संरचना बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बदले सिलेबस में अयोध्या खंड को चार से घटाकर दो पृष्ठ कर दिया गया है और मस्जिद के विध्वंस के कई संदर्भ हटा दिए गए हैं।
अयोध्या प्रकरण के जो महत्वपूर्ण विवरण जो हटाए गए हैं, उनमें राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्थकों को जुटाने के लिए लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व वाली भाजपा की रथ यात्रा, बाबरी मस्जिद को गिराने में कार सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका, 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद के विध्वंस के बाद हुए सांप्रदायिक दंगे, भाजपा शासित राज्यों में राष्ट्रपति शासन और अयोध्या में हुई घटनाओं पर भाजपा का खेद शामिल है।
किताब में किए गए ये बदलाव
संशोधित पाठ्यपुस्तक अयोध्या के इतिहास का एक नया संस्करण भी है। जहां पुरानी पाठ्यपुस्तक में मीर बाक़ी को 16वीं शताब्दी में बाबरी मस्जिद बनाने वाला बताया गया है, वहीं नई पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि तीन गुंबद वाली संरचना श्री राम के जन्मस्थान पर बनाई गई थी और उस संरचना में इसके आंतरिक और बाहरी हिस्सों में हिंदू प्रतीकों और अवशेषों का स्पष्ट प्रदर्शन था।
नई बुक में क्या है?
पुरानी पाठ्यपुस्तक में फरवरी 1986 में मस्जिद के ताले खोले जाने के बाद दोनों पक्षों की लामबंदी, उसके बाद हुए सांप्रदायिक तनाव और मस्जिद के विध्वंस तथा उसके बाद जनवरी 1993 में हुई हिंसा का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसके स्थान पर सांप्रदायिक हिंसा या राजनीतिक नतीजों का उल्लेख किए बिना इन घटनाओं का सारांश देने वाला एक छोटा पैराग्राफ जोड़ दिया गया है।
इसके अलावा, अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले को शामिल करते हुए, कानूनी कार्यवाही से लेकर सौहार्दपूर्ण स्वीकृति तक शीर्षक से एक नया उपखंड जोड़ा गया है। इसमें कानूनी समाधान प्रक्रिया और राम मंदिर के निर्माण पर जोर दिया गया है।
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने पीटीआई से कहा कि पाठ्यक्रम का भगवाकरण करने का कोई प्रयास नहीं, पाठ्यपुस्तकों में सभी परिवर्तन साक्ष्य और तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हमें छात्रों को दंगों के बारे में क्यों पढ़ाना चाहिए। इसका उद्देश्य हिंसक, उदास नागरिक बनाना नहीं है।
