पंजाब की कईं सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों रूपए का फंड जारी किया गया
जालंधर, पंजाब की कईं सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों रूपए का फंड जारी किया गया। इस प्रोजेक्ट के चलते जालंधर सिटी को भी स्मार्ट सिटी बनाने हेतु कुल 60 प्रोजेक्ट तय किए गए थे, लेकिन इन 60 प्रोजेक्ट में से आधे प्रोजेक्ट भी सिरे नहीं चढ पाए हैं। हालात यह हैं कि जालंधर की सडक़े टूटी पड़ी हैं। जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्टों के कारण शहर की हालत काफी बिगड़ गई है। हालांकि इस प्रोजेक्ट के तहत जारी हुए पैसे व घोटालों की जांच पंजाब सरकार ने विजिलेंस को सौंप चुकी है। विजिलेंस का सबसे पहला एक्शन एलईडी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट पर हो सकता है, जिसमें दिल्ली की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप है। आरोप है कि प्रोजेक्ट की लागत पूर्व सीईओ ने 14 करोड़ रुके बढ़ा दी थी। एलईडी प्रोजेक्ट का टेंडर 49.44 करोड़ का था व दिल्ली की एक कंपनी ने इसे करीब 44 करोड़ में हासिल किया। लेकिन जो काम 44 करोड़ रुपए में होना चाहिए था, वह 58 करोड़ तक पहुंच गया।दूसरी तरफ अगर शहर में लगने वाली स्ट्रीट लाईटों की बात करे तो 58 करोड़ की नई लाइटें लगाने के अलावा शहर में इस समय हजारों ऐसी एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिन्हें या तो पुरानी कंपनी ने लगाया हुआ है या यह लाईटे नगर निगम, सांसद या विधायक ग्रांट से लगी हुई हैं। शहर के स्ट्रीट लाइट सिस्टम पर करीब 100 करोड़ खर्च हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद आधा शहर अंधेंरे में है।बाक्सस्वच्छता रैंकिंग में भी लुढका शहरनगर निगम जालंधर की बात करें तो शहर में स्मार्ट सिटी व स्वच्छ भारत मिशन तहत करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद शहर की हालत काफी खराब है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 के नतीजे में पंजाब 7वें स्थान पर है, जबकि जालंधर 239वें स्थान पर लुढक़ गया। पिछली बार जालंधर का रैंक 154 पर पहुंच गया था। स्वच्छता के मामले में पटियाला, मोहाली, बठिंडा, बरनाला, पठानकोट, अबोहर, होशियारपुर जैसेछोटे शहर भी जालंधर से आगे रहे। हालात यह हैं कि जालंधर शहर तो अब लुधियाना और अमृतसर से भी पिछड़ गया है।
