February 21, 2026

आर्थिक तौर पर कमज़ोर वर्गों के लिए आवास निर्माण की ग्रांटें गबन करने के मामले में एक और मुलजिम विजीलैंस ब्यूरो द्वारा गिरफ़्तार

चंडीगढ़, पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने साल 2011-2012 में ग्राम पंचायत खानगाह जि़ला कपूरथला को मिली कुल 4,95,000 रुपए की केंद्रीय अनुदान में से 45,000 रुपए की अनुदान का गबन करने के दोष अधीन एक और मुलजिम गुरदेव सिंह निवासी गाँव खानगाह को गिरफ़्तार किया है। यह फंड उक्त पंचायत को इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत गरीबों और बेघरों के लिए पक्का मकान बनाने के लिए मिले थे। जि़क्रयोग्य है कि यह मुलजिम पिछले सात सालों से फऱार था।  
बताने योग्य है कि करीब 7 साल पहले दर्ज हुए इस केस में शामिल कुल 132 मुलजिमों में से अब तक 119 मुलजिमों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और 11 मुलजिमों की मौत हो चुकी है जबकि बाकी दो मुलजिमों की खोज जारी है।  
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि साल 2011-2012 में गरीबी रेखा से नीचे रहते परिवारों (बी.पी.एल.) के लिए गाँव खानगाह की पंचायत को प्राप्त हुई कुल 4,95,000 रुपए की केंद्रीय अनुदान में से तत्कालीन ए.डी.सी. विकास-कम-मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जि़ला परिषद, कपूरथला सतीश चंद्र वशिष्ट ने गाँव महिमदवाल के सरपंच आसा सिंह और उस समय के पंचायत सचिव कुलवंत सिंह के साथ मिलीभगत करके अयोग्य लाभार्थियों के नाम पर चैक जारी करके ग्रांटों का गबन किया था।  
उन्होंने बताया कि डिप्टी कमिश्नर कपूरथला की सिफ़ारश पर अलग-अलग अधिकारियों वाली पाँच सदस्यीय समिति ने उक्त ग्रांटों के प्रयोग सम्बन्धी पड़ताल की थी, जिस दौरान यह पाया गया कि साल 2011-12 के दौरान कपूरथला जिले के 31 गाँवों से सम्बन्धित 411 अयोग्य लाभार्थियों को 1,80,00,000 रुपए की गलत अदायगी की गई।  
इस सम्बन्धी विजीलैंस ब्यूरो ने विजीलैंस ब्यूरो थाना जालंधर रेंज में 132 मुलजिमों के खि़लाफ़ आइपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1), 13(2) के अंतर्गत मुकदमा नंबर 01 तारीख़ 03-02-17 को केस दर्ज किया था।  
प्रवक्ता ने बताया कि उक्त मुलजिम गुरदेव सिंह ने अयोग्य लाभार्थी होते हुए गाँव खानगाह की सरपंच कुलविन्दर कौर और पंचायत सचिव कुलवंत सिंह के साथ मिलीभगत करके 25,000-25,000 रुपए के दो चैकों के ज़रिये क्रमवार तारीख़ 07-03-2012 और 12-03-2012 को 45,000 रुपए की केंद्रीय अनुदान हड़प ली थी।

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