February 21, 2026

 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू  पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें : कैंथ

भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब संदेशखाली में दलित महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं की निंदा

चंडीगढ़, 17 फरवरी: भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब संदेशखाली में दलित महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं की निंदा करते हुए प्रांतीय उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि दलित महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण, अराजकता, लूटपाट घटनाक्रम की रिपोर्ट राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को सौंप दी है और तत्काल कार्रवाई का अपील की है। 

 कैंथ ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक नेताओं के तत्वावधान में सरकार ने आतंक, गुंडागर्दी, उत्पीड़न और लूटपाट, बलात्कार, जमीन पर जबरन कब्जा और महिलाओं पर अत्याचार का ऐसा खुला नृत्य खेला कि भय के कारण आतंक का माहौल बनाया गया।

उन्होंने आगे कहा कि अनुसूचित जाती समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हितों को इस हद तक कुचला जा रहा है और तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहाँ शेख और उनके समर्थकों ने जबरन जमीन पर कब्जा कर लिया और महिलाओं के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ , यौन दुर्व्यवहार और अत्याचार का कहर बरपाया है।

 श्री कैंथ ने कहा कि हाल ही में, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के विरुद्ध राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू  को बंगाल के 24 उत्तर परगना जिला के संदेशखाली मे कथित छेड़छाड़, यौन शोषण अत्याचार में कानून व्यवस्था बनाए रखने और उत्पात मचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने पर सरकार को संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की गई है। 

कैंथ ने बताई के पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति की 21.51 फीसदी आबादी को नजरअंदाज कर तृणमूल कांग्रेस सरकार अराजकता, लूटपाट, जबरन वसूली, शोषण और दलित महिलाओं के कथित यौन शोषण का शिकार बना रही है।  दलित नेता परमजीत सिंह कैंथ ने अराजकता, असामाजिक तत्वों को राजनीतिक संरक्षण, हर जगह गुंडे-बदमाशों का बोलबाला, बंगाल में दलितों पर हो रहे अत्याचार, उत्पीड़न, लूटपाट, हत्या और दमन के खिलाफ अनुसूचित जाति संगठनों से तृणमूल कांग्रेस के शासन के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की ।

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