जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका निभाए तो आमजनमानस को कैसे मिलेगा न्याय?
ऊना, सुखविंदर / बीती 5 अक्टूबर को कांगड़ा जिला के रे में घटी घटना को लेकर प्रबुद्धजनों, पत्रकारों में खासा रोष दिख रहा है। मामला एक निर्दोष युवक को नशे में धुत होकर पीटते पुलिस कर्मियों को एक पत्रकार द्वारा मात्र कारण पूछने पर उस पत्रकार से मारपीट पर उतारू होना व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। वहीं इसी अत्याचार व अन्याय के खिलाफ पत्रकार भूपिंदर मेहरा ने रोष प्रकट करने के लिए रे में रोष धरना दिया हुआ था। उनकी मांग थी कि पुलिस चौकी रे के ऐसे आमजन के प्रति व्यवहार के चलते जनता में रोष है वही चौकी प्रभारी पर भी कार्यवाही की जाए। जहां क्षेत्र के पत्रकारों ने सरकार व प्रशासन से दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करने की मांग उठाई है। वहीं उन्होंने पुलिस चौकी प्रभारी के विरूद्ध सरकार से कड़ी कार्यवाही की मांग की थी तथा कार्यवाही न होने पर रोष स्वरूप मुंडन कराने का भी एलान करते हुए अनशन पर बैठने की घोषणा की थी। चौकी प्रभारी के विरुद्ध कारवाही न होने मेहरा ने तीन दिन से आमरण अनशन पर बैठकर अपने मुंडन कराकर दोषी पुलिस कर्मियों को प्रशासन व सरकार द्वारा बचाने को लेकर भारी रोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि निर्दोष लोगों से मारपीट व दुर्व्यवहार करने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही न होना दर्शाता है कि आम जनमानस की पीड़ा को लेकर सरकारी तन्त्र किस कद्र संवेदनहीन है। वहीं इस घटना में पुलिसिया व्यवहार की प्रबुद्व वर्ग व पत्रकार वर्ग द्वारा कड़ी निंदा की जा रही है। प्रशासन के इस मामले के प्रति उदासीनतापूर्ण व्यवहार से हर कोई सकते में है।
