दूसरों की निन्दा करने से केवल मात्र आध्यात्मिक पतन है-सूरज भान पराशर
दौलतपुर चौक 28 अक्तूबर (संजीव डोगरा)
राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घनारी में प्रधानाचार्य ललित मोहन की अध्यक्षता में चल रहे एनएसएस के सात दिवसीय आवासीय शिविर के चौथे दिन बौद्धिक सत्र में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सूरजभान पराशर ने शिरकत की। प्रोग्राम ऑफिसर प्राध्यापक अरुणा रानी एवम सतीश के.कालिया की अगुवाई में चल रहे शिविर में
सूरजभान पराशर ने स्वयंसेवियों को सम्बोधित करते हुए “अध्यात्म एवम अनुशासन” के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि अध्यात्म का अर्थ है अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना, मानना और दर्शन करना। उन्होंने बताया कि आत्मा परमात्मा का अंश है और जब भी इस सम्बन्ध में शंका या संशय, अविश्वास की स्थिति पैदा होती है तभी हमारी परमात्मा से दूरी बढती जाती है जिसका परिणाम हमेशा नकारात्मक ही होता है। उन्होंने बताया कि दूसरों की निन्दा करने में न केवल आध्यात्मिक पतन होता है अपितु लौकिक व्यवहार में भी ईर्ष्या, द्वेष आदि का द्वार खुलता है। उन्होंने बताया कि अपने पवित्र लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ब्रह्मचर्य का पालन और परमार्थ के कार्य करने से परमानन्द की अनुभूति होती।साथ ही उन्होंने अनुशासन का भी महत्व बताया और अपने ओजस्वी भाषण से नशे पर भी करारी चोट की। इससे पहले स्वयंसेवियों ने प्रभात फेरी,संकीर्तन,, परेड के इलावा श्रमदान करते हुए बुटेनीकल गार्डन को सँवारा। इस अवसर पर प्राध्यापक बलबिंद्र सिंह,रविन्द्र गुलेरिया, अनिल ठाकुर, कमल इत्यादि उपस्थित रहे।
