लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश
सुधीर शर्मा, अब लोक सभा में महिला सांसदों की कम से कम संख्या 181 हो सकेंगी। लोकसभा में आज 128 वां संविधान संशोधन बिल पेश कर दिया गया, जिसे नारी शक्ति बंधन विधेयक का नाम दिया गया है। विधेयक के मुताबिक लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन लागू होगा। यह रिजर्वेशन परिसीमन के बाद लागू होगा। इसका मतलब स्पष्ट है कि 2024 में होने वाले आम चुनावों तक यह विधेयक लागू नहीं हो पाएगा। क्योंकि डीलिमिटेशन यानी परिसीमन एक लंबी प्रक्रिया है, अतः यह माना जा सकता है कि यह विधेयक 2029 के लोकसभा चुनाव या इससे पहले के कुछ विधानसभा चुनावों में लागू हो सकता है। बिल के पास हो जाने के बाद लोकसभा में कम से कम 181 महिला सांसद हो सकेंगे। वर्तमान में लोकसभा में 82 महिला सांसद है। यह आरक्षण सीधे चुने जाने वाले प्रतिनिधियों के लिए लागू होगा। यानी राज्यसभा में और राज्यों की विधान परिषदों पर यह लागू नहीं होगा। महिला आरक्षण को लेकर संसद में पहले भी प्रयास हुए हैं। 1996 में इससे जुड़ा विधेयक पहली बार पेश किया गया था। अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में कई बार महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया लेकिन उसे पारित करने के लिए उचित बहुमत नहीं जुटाया जा सका था। 2010 में भी मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित कर लिया था। लेकिन उस समय समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दे दी थी। इन दलों के विरोध के कारण यह बिल लोकसभा में पेश नहीं किया गया था।
